ग्रेट हिमालयन पार्क बना विश्व धरोहर
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हिमाचल प्रदेश का ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क सोमवार को प्राकृतिक विश्व धरोहर बन गया। यूनाइटेड नेशन एजुकेशनल साइंटिफिक एंड कल्चरल आर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) ने दोहा में आयोजित 38वें सत्र में नेशनल पार्क को यह दर्जा दिया।
जापान, जर्मनी सहित अन्य कई देशों के सदस्यों ने भारत के दावे समर्थन किया। इसके बाद 21 सदस्यीय वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी ने ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल कर लिया।
हिमाचल के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। इससे अब प्रदेश को विश्व स्तर पर नई पहचान मिलेगी। प्रदेश में पर्यटन विकास में यह दर्जा मील पत्थर साबित हो सकता है।
भारत में अब 31 साइटें विश्व धरोहर
भारत में अभी तक 31 साइटों को विश्व धरोहर का दर्जा मिला था। इसमें महज दस साइट्स को ही प्राकृतिक विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त था। कुल्लू जिले का ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क देश की 32वीं ऐसी साइट है, जिसे विश्व धरोहर का दर्जा मिला है।
प्राकृतिक विश्व धरोहर के लिहाज से ग्रेट हिमालयन पार्क देश की 11वीं साइट बनी है। यूनेस्को के दोहा सत्र में शामिल होने के लिए भारत की ओर भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डा. वीबी माथुर, हिमाचल प्रदेश के प्रधान अरण्यपाल राजीव गुप्ता, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डा. ललित मोहन, अतिरिक्त प्रधान अरण्यपाल संजीवा पांडे जैसे अधिकारी गए हैं। प्रस्ताव पारित होते ही डा. माथुर ने ई-मेल के जरिये अमर उजाला को इसकी सूचना भेजी।
पार्क की ये है खासियत
- पेड़-पौधों और वन्यजीवों की 805 प्रजातियां
- 209 प्रजाति के पक्षी हैं नेशनल पार्क में
- पार्क में 400 किस्म के पेड़-पौधे मौजूद
- तितलियों की 230 प्रजातियां हैं पार्क में
- जड़ी-बूटियों की 250 प्रजातियां मौजूद
- कीड़े-मकोड़ों की भी हैं 125 प्रजातियां
- 35 प्रकार के वन्यजीवों का वास स्थल
1171 वर्ग किलो मीटर में फैला है पार्क
कुल्लू जिले में स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क 1171 वर्ग किलो मीटर में फैला है। पहले पार्क क्षेत्र 754 वर्ग किलोमीटर था। बाद में इसमें 90 वर्ग किलोमीटर की सैंज सेंचुरी, 61 वर्ग किलोमीटर की तीर्थन सेंचुरी और 265 वर्ग किलोमीटर का इक्को जोन क्षेत्र शामिल किया गया। पार्क के दायरे में तीन गांव शाकटी, मरोड़ और शवाड़ हैं। इन गांवों की आबादी सौ से भी कम है। पार्क में देवता आदि ब्रह्मा का मंदिर भी है।
क्या होगा फायदा
- विश्व स्तर पर हिमाचल को नई पहचान
- हिमाचल में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
- संरक्षण के लिए बजट में होगी बढ़ोतरी
- दुर्लभ प्रजातियों को मिलेगा संरक्षण
- पर्यटन बढ़ने से क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ेगा