हिमाचल में बेनामी संपत्तियों की सूची तैयार, मालिकों पर कसेगा शिकंजा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काले धन पर नकेल के बाद हिमाचल में हजारों बेनामी संपत्तियों के मालिकों पर शिकंजा कसने वाला है। ये संपत्तियां दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़ समेत कई राज्यों के लोगों ने यहां बनाई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते रविवार को बेनामी संपत्तियों पर कार्रवाई की बात कही है। इससे बेनामी संपत्तियों के मालिकों की बेचैनी बढ़ गई है।
हिमाचल में राजस्व विभाग की धारा 118 के चलते बाहरी राज्यों के व्यक्ति के लिए जमीन खरीदना आसान नहीं है। इसलिए स्थानीय लोगों के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्तियां खड़ी की गई हैं। कुछ साल पहले राज्य सरकार ने जस्टिस डीपी सूद की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था।
उस आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बड़ी संख्या में बेनामी संपत्तियों की जानकारी सरकार को दी थी। इसके अलावा विजिलेंस और राजस्व विभाग ने अपने स्तर पर भी जांच कर कई मामलों में कई प्रभावशाली लोगों के खिलाफ जांच की लेकिन किसी भी मामले में अब तक बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी।
बेनामी संपत्तियों की सूची तैयार
हिमाचल में लोग बेनामी संपत्तियों के बजाय स्थानीय लोगों को कुछ रुपये देकर उनके नाम पर नियम से ज्यादा की संपत्ति खरीदते हैं। राजस्व विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इन संपत्तियों को खरीदने में बड़ी मात्रा में काला धन इस्तेमाल हुआ है। चूंकि, संपत्तियां असली मालिकों के नाम नहीं होती, इसलिए जांच एजेंसियां भी ज्यादा कुछ नहीं कर पातीं।
मोदी सरकार ने कुछ समय पहले काला धन रखने वालों को अपनी संपत्ति को सार्वजनिक करने के लिए आय घोषणा स्कीम शुरू की थी। दो महीने की स्कीम में लोगों को 45 प्रतिशत टैक्स चुकाकर अपनी आय को कानूनी रूप से सही करने का मौका दिया गया था।
लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोगों ने अपनी संपत्तियों का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया। सूत्र बताते हैं कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग, बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थाओं के साथ मिलकर पहले ही ऐसेे लोगों की सूची तैयार कर ली है। इसी सूची के आधार पर ही अब आने वाले समय में कार्रवाई की जाएगी।
क्या है कानून में
बेनामी सौदों को रोकने के लिए मोदी सरकार ने नया बेनामी संपत्ति कानून बनाया, जो एक नवंबर से लागू हो चुका है। इस कानून के तहत बेनामी सौदों में लिप्त पाए जाने पर सात साल सजा और जुर्माने का प्रावधान है। खास बात यह है कि संपत्ति बेनामी निकली तो केंद्र सरकार उसे अपने कब्जे में भी ले सकेगी।