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वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में लेखा विभाग की भूमिका अहम : शुक्ल
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राज्यपाल ने एजी ऑफिस शिमला में किया पांचवें लेखा सप्ताह काे संबोधित
लोकतांत्रिक शासन को मजबूती देने में ऑडिट संस्थानों की भूमिका को सराहा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी और जनहितकारी बनाने में लेखा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्यपाल ने शुक्रवार को राजधानी शिमला स्थित एजी ऑफिस में पांचवें लेखा सप्ताह (ऑडिट वीक) का शुभारंभ करते हुए लोकतांत्रिक शासन को मजबूती देने में ऑडिट संस्थानों की भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा कि यह विभाग अपनी तथ्य आधारित रिपोर्ट और विभागों को वित्तीय सुझावों के जरिये लोक कल्याणकारी सुशासन की आधारशिला का काम करता है। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग की ओरसे शिमला के गॉर्टन कैसल भवन परिसर में किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि लेखा विभाग लोकतंत्र का एक अनिवार्य स्तंभ है जो जवाबदेही, सुशासन, सार्वजनिक संस्थानों का विधि हित और जनहित में इस्तेमाल सुनिश्चित करता है। हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय और विकासशील राज्य की वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारु बनाए रखने में इस विभाग का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारे राज्य में भौगोलिक, संरचनात्मक, पर्यावरण जोखिम और आपदाओं से जुड़ी चुनौतियां अधिक जटिल हैं, ऐसे में ऑडिट की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है ताकि योजनाओं और परियोजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर सही रूप में नागरिकों तक पहुंच सके। राज्यपाल ने लेखा विभाग में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल में ऑडिट कार्यालय ने डाटा एनालिटिक्स, डिजिटल और हाइब्रिड मॉडल अपनाकर लेखा प्रक्रिया को तेज, सटीक और पारदर्शी बनाया है। इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के उपयोग से विभागों का बोझ कब हुआ है।
इनसेट...
ऑडिट का मतलब केवल आपत्तियां करना नहीं : आलोक
राष्ट्रीय लेखा परीक्षा एवं लेखा अकादमी (एनएएए), शिमला के महानिदेशक एस आलोक ने उद्घाटन संबोधन में बताया कि विभाग की ओर से लेखा परीक्षा को आसान और कागज रहित बनाने के लिए हाइब्रिड और रिमोट ऑडिट जैसे अहम कदम उठाए गए हैं। ऑडिट का मतलब केवल आपत्तियां करना नहीं है बल्कि सरकारी निधि के पारदर्शी और जिम्मेदारी पूर्ण व्यय के साथ-साथ नागरिक केंद्रित एवं लक्ष्य आधारित व्यय का जरिया भी है। इससे पहले राज्यपाल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में प्रधान महालेखाकार पुरुषोत्तम तिवारी, वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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लोकतांत्रिक शासन को मजबूती देने में ऑडिट संस्थानों की भूमिका को सराहा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी और जनहितकारी बनाने में लेखा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्यपाल ने शुक्रवार को राजधानी शिमला स्थित एजी ऑफिस में पांचवें लेखा सप्ताह (ऑडिट वीक) का शुभारंभ करते हुए लोकतांत्रिक शासन को मजबूती देने में ऑडिट संस्थानों की भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा कि यह विभाग अपनी तथ्य आधारित रिपोर्ट और विभागों को वित्तीय सुझावों के जरिये लोक कल्याणकारी सुशासन की आधारशिला का काम करता है। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग की ओरसे शिमला के गॉर्टन कैसल भवन परिसर में किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि लेखा विभाग लोकतंत्र का एक अनिवार्य स्तंभ है जो जवाबदेही, सुशासन, सार्वजनिक संस्थानों का विधि हित और जनहित में इस्तेमाल सुनिश्चित करता है। हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय और विकासशील राज्य की वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारु बनाए रखने में इस विभाग का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारे राज्य में भौगोलिक, संरचनात्मक, पर्यावरण जोखिम और आपदाओं से जुड़ी चुनौतियां अधिक जटिल हैं, ऐसे में ऑडिट की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है ताकि योजनाओं और परियोजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर सही रूप में नागरिकों तक पहुंच सके। राज्यपाल ने लेखा विभाग में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल में ऑडिट कार्यालय ने डाटा एनालिटिक्स, डिजिटल और हाइब्रिड मॉडल अपनाकर लेखा प्रक्रिया को तेज, सटीक और पारदर्शी बनाया है। इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के उपयोग से विभागों का बोझ कब हुआ है।
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ऑडिट का मतलब केवल आपत्तियां करना नहीं : आलोक
राष्ट्रीय लेखा परीक्षा एवं लेखा अकादमी (एनएएए), शिमला के महानिदेशक एस आलोक ने उद्घाटन संबोधन में बताया कि विभाग की ओर से लेखा परीक्षा को आसान और कागज रहित बनाने के लिए हाइब्रिड और रिमोट ऑडिट जैसे अहम कदम उठाए गए हैं। ऑडिट का मतलब केवल आपत्तियां करना नहीं है बल्कि सरकारी निधि के पारदर्शी और जिम्मेदारी पूर्ण व्यय के साथ-साथ नागरिक केंद्रित एवं लक्ष्य आधारित व्यय का जरिया भी है। इससे पहले राज्यपाल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में प्रधान महालेखाकार पुरुषोत्तम तिवारी, वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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