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राज्यपाल ने फैसला लेने में नहीं की जल्दबाजी, दिल्ली भेजी फाइल

Thu, 21 Jul 2016 12:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 21 Jul 2016 12:09 PM IST
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governor acharya dev vrat yet not gave forest clearance
राज्यपाल आचार्य देवव्रत - फोटो : फाइल फोटो

हिमाचल मंत्रिमंडल के इस फैसले पर राजभवन शिमला ने फिलहाल मुहर नहीं लगाई है। राज्यपाल ने इस मामले की फाइल नई दिल्ली भेजी है। मामला वन क्लीयरेंस का है। राजभवन ने मामला वन एवं पर्यावरण से जुड़ा होने के कारण इस पर कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई है। जनजातीय क्षेत्रों में वन क्लीयरेंस को खुद राहत देने के बजाय राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने इस मामले की फाइल नई दिल्ली भेजी है। इस पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से कमेंट मांगे हैं।

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अब राज्यपाल इस मामले में गृह मंत्रालय की राय मिलने के बाद ही निर्णय ले सकते हैं। हिमाचल मंत्रिमंडल ने कुछ महीने पहले फैसला लिया था कि जनजातीय क्षेत्रों किन्नौर, लाहौल स्पीति जिलों, चंबा जिले के पांगी, भरमौर आदि में विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए दो साल तक की अवधि तक वन एवं पर्यावरण मंजूरी की शर्त को खत्म करवाया जाए।
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कानूनी जानकारों के मुताबिक कैबिनेट की सहमति के बाद ऐसा केवल राज्यपाल की मंजूरी पर ही हो सकता है। कुछ समय पहले ही राज्य सरकार ने मंत्रिमंडल के इस फैसले की फाइल राजभवन भेजी, मगर राज्यपाल ने इस पर फैसला नहीं लिया। इसे भारत सरकार के कमेंट के लिए भेज दिया।

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निश्चित अवधि के लिए दे सकते हैं क्लीयरेंस

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राज्यपाल आचार्य देवव्रत - फोटो : फाइल फोटो

अगर इस पर राजभवन में ही फैसला हो जाता तो जनजातीय क्षेत्रों में विभिन्न परियोजनाओं के अलावा सड़कों और अन्य आधारभूत ढांचों को विकसित करने को वन एवं पर्यावरण क्लीयरेंस का पेच फिलहाल हट जाना था। उस स्थिति में राज्य सरकार खुद ही वन कटान और पर्यावरण को प्रभावित करने वाले कार्यों पर फैसले ले सकती थी।

इस मामले में उच्च अधिकारियों का यह तर्क रहा है कि जनजातीय क्षेत्रों में विकास के मामले में राज्यपाल वन एवं पर्यावरण क्लीयरेंस की शर्त को एक निश्चित अवधि के लिए सस्पेंड कर सकते हैं। कानून-नियमों में इसका प्रावधान है, पर उन्होंने मामला गंभीर होने के कारण इस पर जल्दबाजी नहीं की है।

राज्यपाल से मिले तीनों जनजातीय जिलों के विधायक  

तीनों जनजातीय क्षेत्रों के विधायकों ने इस मसले पर कुछ दिन पहले राज्यपाल आचार्य देवव्रत से भी भेंट की। इन विधायकों में किन्नौर के विधायक एवं प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी, लाहौल स्पीति के विधायक एवं राष्ट्रीय जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष रवि ठाकुर और भरमौर के विधायक एवं वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत से इस पर अपने स्तर पर

ही निर्णय लेने का अनुरोध किया, मगर इन्हें राजभवन से बताया गया कि मामले को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा गया है। लाहौल स्पीति के विधायक रवि ठाकुर ने इसकी पुष्टि की। वहीं, राज्यपाल के सचिव पुष्पेंद्र राजपूत के कार्यालय में संपर्क किया गया, लेकिन उनका कमेंट नहीं मिल पाया।

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