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अपराजिता अभियान महिला सशक्तीकरण के लिए वरदान : राज्यपाल

Sun, 06 Jan 2019 10:20 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 06 Jan 2019 10:20 AM IST
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Governor Acharya Dev Vrat  in amar ujala 100 million Smiles Aparajita programme in Mandi

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अमर उजाला के ‘अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स’ अभियान को महिला सशक्तीकरण की उद्देश्यपूर्ति के लिए वरदान बताया है। शनिवार को नेरचौक मेडिकल कॉलेज के सभागार में अपराजिता के कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि देशभर की महिलाएं इस अभियान से सशक्त हो रही हैं।

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कृषि और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुहिम से महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। निश्चित तौर पर यह अभियान देश निर्माण में महिलाओं की भूमिका को और विस्तार दे रहा है। इस अवसर पर राज्यपाल ने प्राकृतिक खेती को समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि उपज बढ़ाने के नाम पर खेतों में रासायनिक उर्वरकों के रूप में जहर डाला जा रहा है। असल में रासायनिक खेती पाप है जिसका प्रायश्चित प्राकृतिक खेती के रूप में पुण्य से किया जा सकता है। राज्यपाल ने कहा कि लोगों को दुख देना पाप है और सुख देना पुण्य।
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खेती पर भी यही सिद्धांत लागू होता है। प्राकृतिक खेती के फायदे गिनाते हुए आचार्य देवव्रत ने कहा कि इससे जमीन का संरक्षण होता है। मिट्टी का उपजाऊपन बढ़ता है। इससे मानव शरीर स्वस्थ रहता है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में महिलाएं बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने इतिहास के अलग-अलग कालखंडों का उदाहरण देकर महिलाओं के संघर्ष पर रोशनी डाली। साथ ही वैदिक काल में महिला-पुरुष की समानता की व्यवस्था को वर्तमान में भी व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया।

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वैदिक काल में महिला-पुरुष थे एक समान

Governor Acharya Dev Vrat  in amar ujala 100 million Smiles Aparajita programme in Mandi

राज्यपाल ने कहा कि वैदिक काल में महिलाओं और पुरुषों को एक समान दर्जा प्राप्त था। दोनों के जीवन पर किसी का कोई हस्तक्षेप नहीं होता था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राजा जनक की भेंट एक बार एक नौजवान युवती से हुई थी, जिसने गेरुवें वस्त्र धारण किए हुए थे। तब राजा ने उससे सवाल किया था कि इस जवानी में वह गेरुवे वस्त्र क्यों धारण किए हुए हैं। इस पर उस युवती ने जवाब दिया कि वह ऐसे पुरुष से शादी करेगी जो उसे शास्त्रार्थ में हरा सके, लेकिन आज तक ऐसा कोई नहीं मिला। इसलिए समय बरबाद न करते हुए वह संन्यासी बन गई है। अब वह इस प्रकार से ही अपना जीवन व्यतीत करेगी।

मध्य युग में महिलाओं ने सहे कई अत्याचार      
आचार्य देवव्रत ने कहा कि मध्य युग में विदेशी आक्रमणकारियों के आने से देश में महिलाओं पर अत्याचार बढ़े। इसी कारण यहां पर पर्दा प्रथा ने भी जन्म लिया और महिलाएं चारदीवारी में कैद हो गईं। उन्होंने कहा कि उस समय के कवियों और साहित्यकारों ने भी महिलाओं के चरित्र पर कई बातें बनाकर उनको हानि पहुंचाई। महिलाओं को शिक्षा दिलाने वालों को समाज से तिरस्कृत कर दिया जाता था।      

समाज सुधारकों ने महिलाओं को दिलाया समाज में स्थान       
राज्यपाल ने कहा कि राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद सरस्वती और श्रद्धानंद जैसे समाज सुधारकों ने महिलाओं को समाज में एक बार फिर स्थान दिलाया है। उनके प्रयासों से ही महिला विरोधी कई प्रथाओं का अंत हुआ। आज के युग में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले कहीं अधिक आगे हैं। हर क्षेत्र में महिलाएं ऊंचाईयों को छू रही हैं। उन्होंने कहा कि आज जब वह किसी भी विश्वविद्यालय में पारितोषिक वितरण को जाते हैं तो 100 में से 80 पारितोषिक बेटियां ही ले जाती हैं।

करुणा, दया, सहनशीलता में नारी का सानी नहीं      
महिलाओं को सर्वोच्च दर्जा देते हुए राज्यपाल ने कहा कि महिलाएं करुणा, दया और सहनशीलता की सबसे बड़ी मिसाल हैं। अगर किसी महिला का पति गुजर जाता है तो वह अपने बच्चों को हजारों कठिनाइयां सहकर भी पढ़ा लिखाकर योग्य बना देती हैं, लेकिन अगर किसी की पत्नी गुजर जाए तो बहुत विरले ऐसे लोग होते हैं, जो अपने बच्चों को योग्य बना पाते हैं।

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