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कृषि वैज्ञानिकों पर बरसे राज्यपाल, बोले- 1988 से आज दिन तक हिमाचली किसान जागरूक नहीं हो पाए

Wed, 24 Oct 2018 06:00 AM IST
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 24 Oct 2018 06:00 AM IST
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governor acharya dev vrat hita out at agriculture scientists in shimla

पीटर हाफ में कार्यशाला के दौरान किसानों और वैज्ञानिकों की कम संख्या पर राज्यपाल चिंतित दिखे। इस पर उन्होंने कहा कि ऐसे में कैसे प्रदेश में छरमा किसानों में लोकप्रिय हो सकेगा।

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कृषि वैज्ञानिकों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों के लिए खोज की जा रही हैं, अंग्रेजी में किताबें छप रही हैं। किसान अंग्रेजी में कैसे जानकारी ले सकेगा। इस प्रकार की गोष्ठियां 1988 से हो रही हैं और करोड़ों रुपये खर्च किए गए।
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हम से आगे पाकिस्तान सहित अन्य देश निकल गए हैं। प्रदेश के वैज्ञानिक सीबाक्थार्न पर 1988 से काम कर रहे हैं। सेमिनार हाल में वैज्ञानिकों और किसानों की संख्या देखकर लग रहा है कि इस दिशा में अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है।

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governor acharya dev vrat hita out at agriculture scientists in shimla

यही करण है कि वर्ष 1988 से लेकर आज तक हिमाचल में सीबाक्थार्न का विस्तार नहीं हो पाया और न ही किसानों को इसके प्रति जागरूक किया जा सका है।राज्यपाल ने कहा कि भविष्य में कभी ऐसा कोई सेमिनार होता है तो अधिक संख्या में किसान बुलाए जाएं।

सब कुछ कागजों में हो रहा है, हकीकत कुछ और ब्यां कर रही है। गोष्ठियों में करोड़ों खर्च करने से इसका लाभ किसी को नहीं होगा। धरातल पर बहुत कुछ करने की जरूरत है। पालमपुर विश्वविद्यालय इस दिशा में और अधिक कार्य करे।  

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