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छात्रों के निष्कासन को रद्द करे सरकार : एसएफआई
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प्राचार्य के माध्यम से शिक्षा मंत्री को भेजा मांगपत्र, शिक्षा के अधिकार का हनन कर रहा कॉलेज
संजौली कॉलेज से निष्कासित किए हैं छह छात्र
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राज्य कमेटी के आह्वान पर वीरवार को एसएफआई ने पूरे प्रदेश में कॉलेज प्राचार्यों के माध्यम से शिक्षा मंत्री को मांगपत्र भेजकर संजौली कॉलेज के छह छात्रों का निष्कासन वापस लेने की मांग की। निष्कासन का लगातार विरोध कर रही एसएफआई के नेताओं का आरोप है कि यह निष्कासन अवैध है और राजनीति से प्रेरित है।
छात्र नेताओं ने कहा कि कॉलेज प्रशासन ने सरकार के इशारे पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने के लिए यह फरमान जारी किया है। एसएफआई के राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर और सचिव दिनीत देंटा ने कहा कि एसएफआई संजौली महाविद्यालय में कॉलेज के मुद्दों, फीस बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन कर रही थी उसी आंदोलन को दबाने के मकसद से एसएफआई के छह कार्यकर्ताओं को कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया। एसएफआई ने निष्कासन के मामले को लेकर उच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई भी लड़ी है, जिसके चलते छात्रों को हाउस एग्जाम देने का मौका मिला है। न्यायालय ने इस निष्कासन मामले की जांच के लिए विवि प्रशासन को आदेश दिए थे। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हिमाचल विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक जांच कमेटी का गठन किया।
तीन महीने से जांच कमेटी रिपोर्ट नहीं दे पाई है। इस कारण छात्रों के शिक्षा के अधिकार का हनन हो रहा है। दिनीत देंटा ने कहा कि निष्कासन का पूरे प्रदेश में विरोध किया गया और कॉलेज प्राचार्यों के माध्यम से शिक्षा मंत्री तथा विवि के कुलपति को मांग पत्र भेजे हैं। इन छह छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए तुरंत निष्कासन को वापस लेने की मांग की है। मार्च में यूजी की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, यदि निष्कासन वापन न लिया तो इन छात्रों का एक साल बर्बाद हो सकता है। इसलिए उन्होंने शिक्षा मंत्री से इन छात्रों को पिछली परीक्षा देने का मौका देने और वार्षिक परीक्षा के शुरू होने से पूर्व निष्कासन वापस लेने की मांग की है। राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने चेताया कि यदि कॉलेज प्रशासन ने यह अवैध निष्कासन वापस न लिया तो एसएफआई पूरे प्रदेश में विवि प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन करेगी।
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संजौली कॉलेज से निष्कासित किए हैं छह छात्र
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राज्य कमेटी के आह्वान पर वीरवार को एसएफआई ने पूरे प्रदेश में कॉलेज प्राचार्यों के माध्यम से शिक्षा मंत्री को मांगपत्र भेजकर संजौली कॉलेज के छह छात्रों का निष्कासन वापस लेने की मांग की। निष्कासन का लगातार विरोध कर रही एसएफआई के नेताओं का आरोप है कि यह निष्कासन अवैध है और राजनीति से प्रेरित है।
छात्र नेताओं ने कहा कि कॉलेज प्रशासन ने सरकार के इशारे पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने के लिए यह फरमान जारी किया है। एसएफआई के राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर और सचिव दिनीत देंटा ने कहा कि एसएफआई संजौली महाविद्यालय में कॉलेज के मुद्दों, फीस बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन कर रही थी उसी आंदोलन को दबाने के मकसद से एसएफआई के छह कार्यकर्ताओं को कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया। एसएफआई ने निष्कासन के मामले को लेकर उच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई भी लड़ी है, जिसके चलते छात्रों को हाउस एग्जाम देने का मौका मिला है। न्यायालय ने इस निष्कासन मामले की जांच के लिए विवि प्रशासन को आदेश दिए थे। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हिमाचल विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक जांच कमेटी का गठन किया।
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तीन महीने से जांच कमेटी रिपोर्ट नहीं दे पाई है। इस कारण छात्रों के शिक्षा के अधिकार का हनन हो रहा है। दिनीत देंटा ने कहा कि निष्कासन का पूरे प्रदेश में विरोध किया गया और कॉलेज प्राचार्यों के माध्यम से शिक्षा मंत्री तथा विवि के कुलपति को मांग पत्र भेजे हैं। इन छह छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए तुरंत निष्कासन को वापस लेने की मांग की है। मार्च में यूजी की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, यदि निष्कासन वापन न लिया तो इन छात्रों का एक साल बर्बाद हो सकता है। इसलिए उन्होंने शिक्षा मंत्री से इन छात्रों को पिछली परीक्षा देने का मौका देने और वार्षिक परीक्षा के शुरू होने से पूर्व निष्कासन वापस लेने की मांग की है। राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने चेताया कि यदि कॉलेज प्रशासन ने यह अवैध निष्कासन वापस न लिया तो एसएफआई पूरे प्रदेश में विवि प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन करेगी।
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