तीन साल से तंबू के नीचे चल रहा स्कूल, बारिश में बच्चों को पकड़ने पड़ते हैं तंबू के डंडे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिमला जिले के चौपाल उपमंडल का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल ईड़ा पिछले तीन सालों से तंबू के नीचे चल रहा है। छठी से 12वीं तक की कक्षाओं के 150 विद्यार्थी तंबू के नीचे पढ़ाई को मजबूर हैं। अंधड़-बारिश पर बच्चों को किताबें छोड़ तंबू के डंडे पकड़ने पड़ते हैं ताकि सिर से एकमात्र तिरपाल भी न छिन जाए।
ज्यादा बारिश हुई तो बच्चे पड़ोस के घरों के बरामदों में शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं। स्कूल का अपना शौचालय भी नहीं हैं, प्राइमरी स्कूल में जाना पड़ता है।
भवन के नाम पर सात कक्षाओं वाले स्कूल के पास एक कमरा है जिसमें कंप्यूटर और साइंस लैब है। दूसरे अस्थायी कमरे में स्कूल कार्यालय है। स्टाफ भी यहीं बैठता है। बारिश पर बच्चे यहां ठूंस-ठूंस कर भर दिए जाते हैं।
अक्तूबर 2015 में भवन असुरक्षित घोषित
चौपाल की खूंद नेवल पंचायत के 36 साल पुराने ईड़ा स्कूल को वर्ष 1979 में प्राइमरी से मिडिल किया गया। वर्ष 1998 में इसका दर्जा बढ़ा कर हाई स्कूल किया गया। स्कूल में छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वर्ष 2007 में फिर स्तरोन्नत कर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल का दर्जा दिया गया।
लेकिन अक्तूबर 2015 में भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया गया। 14 अक्तूबर 2016 को इन्हें गिरा दिया गया। इसके बाद स्कूल तंबू के नीचे आ गया। सरकार का मजाक देखिए यहां भवन बनाने के स्थान पर मई 2018 में स्कूल चलाने के लिए तिरपाल उपलब्ध करवाए गए।
ईड़ा स्कूल के प्रधानाचार्य राजेंद्र ठाकुर का कहना है कि भवन निर्माण के लिए सरकार की ओर से 29 लाख रुपये मंजूर हुए हैं। 11 लाख रुपये लोक निर्माण विभाग के पास जमा हैं, लेकिन बच्चे तिरपाल के नीचे पढ़ाई को मजबूर हैं। स्कूल में स्टाफ की भी कमी है।
नहीं चला सकते तो सरकार बंद कर दे स्कूल
स्कूल के प्रबंधन समिति अध्यक्ष जयपाल, सदस्य छज्जू राम, रमा देवी, मनोज, सुरेश, मस्त राम व प्रतिभा ने कहा सरकार स्कूल को चला नहीं सकती तो बंद कर दे। यहां पर शिक्षा के नाम पर बच्चों के साथ मजाक हो रहा है। उन्होंने शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से आग्रह किया कि स्कूल में पहुंच कर यहां की मूलभूत सुविधाओं को स्वयं जायजा लें।
संबंधित अफसरों से मांगी जाएगी रिपोर्ट- उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरदेव ने बताया है कि स्कूल भवन बनाने के लिए बजट मंजूर किया गया है। भवन निर्माण में देरी क्यों हो रही है, इसको लेकर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। भवन निर्माण कर रहे विभाग से भी जवाब तलब किया जाएगा।