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RTI: सूचना देने के सवा 30 लाख, डाक खर्च के मांगे 73 हजार

Mon, 21 May 2018 10:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोहर (मंडी)
अमर उजाला ब्यूरो, गोहर (मंडी) Updated Mon, 21 May 2018 10:20 AM IST
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government officer asks appellant to deposit rupee 30 lakh for Right to information

सूचना के अधिकार के तहत आवेदक को जानकारी मांगना कुछ ज्यादा ही महंगा पड़ रहा है। जानकारी देने से पहले ही विभाग ने सूचना के 30 लाख 34 हजार 738 रुपये और डाक खर्च के 73150 हजार रुपये मांग लिए। मामला हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के विकास खंड गोहर का है।

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आवेदक ने पिछले पांच साल के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों, गर्भवती महिलाओं और पोषाहार देने की सूचना मांगी थी। आवेदक को एडवांस फीस जमा कराने को कहा गया है।

आवेदक ने लाखों रुपये की फीस की मांग को विभागीय गड़बडि़यां छिपाने के लिए दबाव बनाने से प्रेरित बताया है। आवेदक ने इस मामले पर जिला प्रशासन से संज्ञान लेकर जांच कराने की मांग की है।

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सूचना की फीस में एक फोटो कॉपी का 20 रुपये शुल्क

government officer asks appellant to deposit rupee 30 lakh for Right to information

जानकारी के अनुसार चैलचौक की एक गैर सरकारी संस्था ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय गोहर से विकास खंड में स्थित सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का 5 साल का रिकार्ड मांगा था।

आवेदक के अनुसार मांगी गई सूचना बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय गोहर आज तक तैयार नहीं कर पाया। सूचना उपलब्ध कराने के बजाय परियोजना अधिकारी ने बिना सूचना तैयार किए 8 मई, 2018 को संस्था के नाम पर 30,34,738 रुपये और डाक का खर्च 73150 रुपये का बिल भेज दिया।

जिला कार्यक्रम अधिकारी ने सूचना तैयार करने के लिए 9 लाख रुपये मांगे हैं, जबकि इसके तीन गुना से ज्यादा 30,34,738 रुपये संस्था से सूचना के शुल्क के रूप में मांगे हैं। पत्र में फोटो कापी का प्रति पेज मूल्य 20 रुपये मांगा है।

पत्र मिलने के बाद संस्था की टीम चेकबुक लेकर 14 मई को जनसूचना अधिकारी गोहर के कार्यालय में पहुंची तो पाया कि सूचना तैयार ही नहीं हैं। इस बाबत पूछने पर जनसूचना अधिकारी गोहर ने बताया कि मांगी गई सूचना तभी तैयार होगी, जब आप 30,34,738 रुपये अग्रिम जमा करवाएंगे।

जिला प्रशासन ले मामले का संज्ञान

government officer asks appellant to deposit rupee 30 lakh for Right to information

गैर सरकारी संस्था के अध्यक्ष सुरेश कुमार का आरोप है कि यह संस्था को सूचना न लेने के लिए विवश करने या सूचना के नाम पर डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार परियोजना अधिकारी सूचना नहीं देे रही हैं, उससे लगता है कि विकास खंड गोहर के आंगनबाड़ी केंद्रों में घोटाला हुआ है।

राइट एनजीओ ने उपायुक्त मंडी को लिखे एक पत्र में इस मामले में संलिप्त दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई है।

बाल विकास परियोजना अधिकारी गोहर सीमा ठाकुर ने कहा है कि सूचना का अधिकार कानून के अंतर्गत विभाग से मांगी गई सूचना की फीस 30 लाख रुपये के करीब बनती है। प्रावधान के अनुसार प्रार्थी से राशि जमा करवाने हेतु पत्र भेजा गया है।

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