चार हजार शिक्षकों को सरकार ने दिया झटका
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वालंटियर से रेगुलर हुए 4159 शिक्षकों को पिछली तारीख से सभी सेवालाभ देने का मामला फिर उलझ गया है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने जनवरी 2013 में इन्हें करीब पांच साल का एरियर अदा करने के आदेश दिए थे।
इस फैसले को लागू करते हुए प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने 58 करोड़ रुपये अतिरिक्त बजट सरकार से मांगा। वित्त विभाग ने इसकी अदायगी में असमर्थता जताते हुए विभाग को इस फैसले के खिलाफ अपील में जाने की सलाह दी है।
अब प्रारंभिक शिक्षा विभाग कोर्ट में अपील दायर करेगा। हिमाचल में 1985 और 1991 में दो स्कीमों के तहत प्राइमरी स्कूलों में वालंटियर टीचर रखे गए थे। बाद में इन्हें जेबीटी प्रमाणपत्र देकर रेगुलर कर दिया।
4159 शिक्षकों को पांच वर्ष का मिलना था एरियर
1985 में नियुक्त शिक्षकों को जेबीटी प्रमाणपत्र 10 साल की सेवा के बाद मिले, जबकि 1991 में नियुक्त शिक्षकों को ये 5 साल सेवाकाल के बाद दे दिए गए। इससे पश्चात नियुक्त शिक्षक पहले से तैनात शिक्षकों से सीनियर हो गए और विवाद कोर्ट में चला गया।
न्यायाधीश राजीव शर्मा ने इस केस में फैसला देते हुए 1 अगस्त 1998 की कट ऑफ तिथि को रद करते हुए कहा था कि दोनों ही तरह की स्कीमों के लिए 5 साल ही सेवाकाल हो और पहले नियुक्त शिक्षकों को पांच साल बाद ही रेगुलर मानते हुए सारे सेवा लाभ दिए जाएं।
कोर्ट में दिए गए आंकड़ों में इनकी कुल संख्या 4159 बताई गई। ये रेगुलर हो गए हैं और कुछ तो रिटायर भी हो गए हैं। अब प्रारंभिक शिक्षा विभाग को इस केस में अपील दायर करनी है। हालांकि, विधि विभाग ने इस फाइल पर सलाह दी थी कि इस केस में अपील दायर करना निरर्थक है।