होमगार्डों को पुलिस कर्मियों के समान वेतन देने को तैयार नहीं सरकार
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हिमाचल के हजारों होमगार्डों को प्रदेश सरकार नियमित पुलिस कर्मचारियों की बेसिक पे के बराबर वेतन देने को तैयार नहीं है। राज्य सरकार अपना स्टैंड सुप्रीम कोर्ट में रखने जा रही है। बराबर वेतन न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को नोटिस जारी किया है।
सरकार नोटिस पर 22 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में जवाब दायर करेगी। होमगार्डों का आरोप है कि उन्हें न्यायालय के आदेशों के अनुरूप न तो पूरा वेतन दिया गया और न ही एरियर का भुगतान किया गया है।
विवेंद्र कुमार बनाम हिमाचल सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर जवाब तैयार करने के लिए राज्य गृह विभाग के अधिकारियों ने मुख्य सचिव बीके अग्रवाल से भी चर्चा की है। सूत्रों की मानें तो सरकार सुप्रीम कोर्ट मेें अपना यही स्टैंड रखेगी कि होमगार्डों को उनका देय वेतन चुकता कर दिया गया है।
सरकार इस दलील को देने की तैयारी में
अब इनका कुछ भी बकाया नहीं है। इसके लिए ये दलील देने की तैयारी है कि पुलिस कर्मचारियों की तरह होमगार्डों के आरएंडपी रूल्स नहीं हैं। वर्तमान में होमगार्डों को करीब 18 हजार रुपये वेतन मिल रहा है जबकि 34000 रुपये मासिक वेतन की मांग की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला 11 मार्च 2015 को आया था। इसके अनुसार पुलिसकर्मियों को मिलने वाले न्यूनतम वेतन की तरह ही होमगार्डों को भी मासिक वेतन दिया जाना था।
पुलिसकर्मियों मेें से अनुबंध वालों का मासिक मूल वेतन 5,910 रुपये है और नियमित कर्मचारियों का 10,300 रुपये मासिक है। इसे नियमित के हिसाब से दिया जाना चाहिए, जो करीब 34000 रुपये बनता है।