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अब गूगल अर्थ की नजरों से बच पाना मुश्किल

Sat, 10 Jan 2015 11:59 PM IST
Updated Sat, 10 Jan 2015 11:59 PM IST
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google earth gps will be installed at mining sites in himachal pradesh.

सरकारी भूमि पर खनन की अनुमति अब आसान नहीं होगी। इसके लिए परियोजना संचालकों को गूगल मैपिंग के जरिये आवेदन करना होगा। खनन साइट पर ग्लोबल पॉजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) स्थापित होने के बाद ही केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से ईआईए की फाइल मंजूर होगी।

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वहीं, मंत्रालय अब जीपीएस के माध्यम से गूगल अर्थ से खनन साइटों पर नजर रखेगा। क्रशर या अन्य परियोजनाओं के लिए खनन की अनुमति अब गूगल मैपिंग से ही मिलेगी। खनन के लिए चिन्हित साइट पर अतिक्रमण या अन्य गतिविधियों की जानकारी अब सीधे गूगल अर्थ पर अपलोड होगी।
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जीपीएस की आधुनिक तकनीक अपनाने की तैयारी

google earth gps will be installed at mining sites in himachal pradesh.

भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने खनन के लिए अलॉट पट्टों पर नजर रखने के लिए जीपीएस की आधुनिक तकनीक को अपनाने की व्यवस्था की है। बाकायदा इसको लेकर संबंधित विभाग को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अकेले ऊना जिला में क्रशर के लिए लगभग दो दर्जन आवेदन पाइपलाइन में हैं, जिन्हें गूगल मैपिंग की आवश्यक औपचारिकता पूरी करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

वहीं, विभाग के पास दस नए आवेदन भी आए हैं, जिन्हें मंजूरी मिलने से पहले प्रोजेक्ट साइट पर ग्लोबल पॉजिशनिंग सिस्टम स्थापित करने होंगे। इसके  स्थापित होने के बाद ही इआईए और एमफार्म जारी हो सकेंगे। जिला खनन अधिकारी नीरजकांत ने बताया कि अब किसी भी तरह की खनन साइट की मंजूरी के लिए गूगल मैपिंग अनिवार्य कर दी गई है।

ऐसे होगी गूगल मैपिंग

google earth gps will be installed at mining sites in himachal pradesh.

गूगल मैपिंग करने के लिए खनन के लिए चिन्हित साइट पर कंक्रीट के पिल्लर खड़े कर उनमें जीपीएस स्थापित किए जाएंगे। जीपीएस उपकरण के माध्यम से गूगल अर्थ पर हाई रेज्यूलेशन तस्वीरें अपलोड हो सकेंगी, जिसके जरिये मंत्रालय खनन के लिए स्वीकृत साइट की सही जानकारी रख सकेगा।

जीपीएस से यह भी नजर रखी जा सकेगी की संबंधित साइट पर किसी तरह का अतिक्रमण या अवैध खनन तो नहीं हो रहा। यह सिस्टम रिवर बेल्ट और हिल स्लोप दोनों तरह की भूमि पर लागू होगा।

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