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Shimla News: पति को जवाब और संपत्ति का ब्योरा पेश करने का दें अवसर

Mon, 26 Oct 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 26 Oct 2026 11:59 PM IST
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Give the husband an opportunity to respond and submit details of his assets.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत का फैसला
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गुजारा भत्ते के लिए हलफनामा लेना अनिवार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी चौपाल के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत पति का बचाव करने का अधिकार समाप्त (स्ट्राइक ऑफ) कर दिया था।
अदालत ने पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए ट्रायल कोर्ट में भेज दिया है। साथ ही निर्देश दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पति को जवाब और संपत्ति एवं देनदारियों का हलफनामा पेश करने का एक अवसर दिया जाए। मामले के अनुसार ठियोग निवासी अमरजीत के खिलाफ उनकी पत्नी सुनीता देवी ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के तहत याचिका दायर की है। इसमें संरक्षण, निवास, अंतरिम राहत और गुजारा भत्ते की मांग की थी।
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चौपाल अदालत में निर्धारित तारीखों पर जवाब दाखिल नहीं करने और हर्जाने की राशि जमा नहीं करने पर अदालत ने 6 मई 2024 को पति का बचाव करने का अधिकार समाप्त कर दिया था। इस आदेश को अमरजीत ने सत्र अदालत में चुनौती दी। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि जवाब दाखिल करने और गवाहों से जिरह करने का अवसर दिए बिना बचाव का अधिकार समाप्त करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। सत्र अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि गुजारा भत्ते या वित्तीय राहत की मांग वाले मामलों में दोनों पक्षों से उनकी संपत्ति और देनदारियों के विवरण का हलफनामा लेना अनिवार्य है। अदालत के अनुसार ट्रायल कोर्ट ने इस कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया था। अदालत ने चौपाल कोर्ट के 6 मई 2024 के आदेश को निरस्त करते हुए पति को जवाब और हलफनामा दाखिल करने का एक और अवसर देने के निर्देश दिए। साथ ही दोनों पक्षों को 13 नवंबर 2026 को चौपाल अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।
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