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Shimla News: सुप्रीम आदेश पर हल कराएं लावारिस कुत्तों की समस्या

Tue, 28 Oct 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Oct 2025 11:59 PM IST
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Get the problem of stray dogs solved on Supreme Court orders
शिमला नागरिक सभा ने का सरकार से आग्रह
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दावा, मुख्य सचिव को 3 नवंबर न्यायालय में किया है तलब
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला में लावारिस कुत्तों के काटने के लगातार बढ़ रहे मामलों और इससे शहर में खड़ी हुई समस्या का शिमला नागरिक सभा ने समाधान करने की मांग की है। सभा ने राज्य सरकार और नगर निगम शिमला से इसको लेकर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

नागरिक सभा के अध्यक्ष जगमोहन ठाकुर और सचिव विवेक कश्यप ने लावारिस कुत्तों के कारण खड़ी हुई इस समस्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 22 अगस्त 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल सहित सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को लावारिस कुत्तों की अनिवार्य बंध्याकरण (प्रजनन रोकने की प्रक्रिया) और टीकाकरण (रैबीज विरोधी) के संबंध में स्पष्ट तथा बाध्यकारी निर्देश जारी किए हैं। दो महीने बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को कोई भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। सर्वोच्च अदालत ने आदेशों की गैर अनुपालन का गंभीर संज्ञान लिया है और हिमाचल सहित सभी मुख्य सचिवों को 3 नवंबर 2025 को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया है।
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जगमोहन ठाकुर ने कहा कि मात्र तीन राज्यों ने अनुपालन शपथपत्र प्रस्तुत किए हैं। यह विकास स्थिति की गंभीरता और ऐसे महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य और सुरक्षा मामलों पर कार्य करने के लिए सरकार की संवेदनशीलता की कमी को प्रदर्शित करता है। 22 अगस्त के जारी निर्देशों में सभी लावारिस कुत्तों की अनिवार्य बंध्याकरण, पर्याप्त बंध्याकरण केंद्रों और मोबाइल यूनिटों बनाने, कुत्तों का पूर्ण रैबीज विरोधी टीकाकरण पर शपथपत्र दाखिल करने को कहा है। उन्होंने कहा कि शहर के हर वार्ड में कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग भी इसका शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और निगम सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को सुझाव न माने इसे बाध्यकारी आदेश के रूप मान कर जनता की सुरक्षा में इसकी पालना करे।
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सभा ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
शिमला नागरिक सभा ने चेतावनी दी है कि अदालत के आदेशों की पालना करने में निरंतर लापरवाही और निष्क्रियता से अवमानना की कार्यवाही और राज्य प्रशासन के लिए आगे की कानूनी जटिलताएं हो सकती हैं। शिमला नागरिक सभा ने चेतावनी दी है कि तुरंत कार्य करने में विफल रहने से न केवल न्यायिक कार्रवाई आमंत्रित होगी बल्कि उन नागरिकों के जीवन और सुरक्षा को और अधिक खतरे में डालेगा।
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