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Shimla News: निजी बस हादसा मामले में बीमा कंपनी को 1.44 लाख चुकाने के आदेश

Tue, 08 Sep 2026 11:43 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2026 11:43 PM IST
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court news shimla
सिर्फ ओवरलोडिंग के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता बीमा क्लेम
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2019 में कुल्लू में हुई थी बस दुर्घटनाग्रस्त
रुचि सांख्यान
शिमला। हिमाचल प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि वाहन दुर्घटना का मुख्य कारण ओवरलोडिंग साबित न हो तो बीमा कंपनी केवल अधिक सवारियां होने के आधार पर क्लेम पूरी तरह खारिज नहीं कर सकती। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की खंडपीठ ने जिला उपभोक्ता मंडी के फैसले में आंशिक संशोधन करते हुए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को पीड़ित बस मालिक को गैर-मानक आधार पर 1,44,000 रुपये का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
मंडी जिला के निवासी राकेश कुमार की निजी बस 20 जून 2019 को कुल्लू जिले के बंजार तहसील स्थित भियूट मोड़ पर गहरी खाई में गिर गई थी। हादसे के वक्त वाहन यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से बीमित था। दुर्घटना के बाद बीमा कंपनी की ओर से नियुक्त सर्वेयर ने साल्वेज काटकर कुल 1,92,000 रुपये के नुकसान का आकलन किया था। हालांकि, बीमा कंपनी ने 17 दिसंबर 2019 को क्लेम यह कहते हुए खारिज कर दिया कि 44 सीटर बस में हादसे के वक्त करीब 81 यात्री सवार थे जो पॉलिसी की शर्तों का सीधा उल्लंघन है। इसके खिलाफ बस मालिक ने जिला उपभोक्ता आयोग मंडी का दरवाजा खटखटाया। जिला आयोग ने क्लेम स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 1,92,000 छह फीसदी ब्याज सहित, 15,000 रुपये मानसिक उत्पीड़न और 5,000 रुपये मुकदमा खर्च अदा करने का फैसला सुनाया था। इस फैसले को बीमा कंपनी ने राज्य आयोग में चुनौती दी थी।
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राज्य उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस एफआईआर और सर्वेयर रिपोर्ट का अवलोकन किया। आयोग ने पाया कि हादसे की मुख्य वजह चालक की लापरवाही और तीखे मोड़ पर बस का पीछे की ओर लुढ़कना था न कि ओवरलोडिंग। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले लखमी चंद बनमा रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी का हवाला देते हुए कहा कि यदि बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रहती है कि दुर्घटना अतिरिक्त सवारियों की वजह से ही हुई थी तो क्लेम को पूरी तरह रद्द नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में क्लेम का निपटारा गैर-मानक आधार पर होना चाहिए।
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राज्य आयोग ने जिला आयोग के फैसले को संशोधित करते हुए सर्वेयर की ओर से आंके गए 1,92,000 रुपये के नुकसान का 75 प्रतिशत यानी 1,44,000 रुपये पीड़ित को देने का आदेश दिया है। जिला आयोग की ओर से तय ब्याज और अन्य शर्तों को आयोग ने यथावत रखा है।
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