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वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट, इन राज्यों में भूकंप से हो सकती है बड़ी तबाही

Wed, 01 Feb 2017 03:16 PM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 01 Feb 2017 03:16 PM IST
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Geothermal energy Can Cause earthquake in North India

हिमालयी श्रंखला का निचला हिस्सा जहां मैदानी क्षेत्रों से जुड़ा है, उस पट्टी में जमा हो रही भूगर्भीय ऊर्जा कभी भी बड़ा भूकंप ला सकती है। इस पट्टी को हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट (एचएफटी) कहते हैं। विज्ञानियों का आकलन है कि यहां 9 रेक्टर स्केल तक भूकंप

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कभी भी आ सकता है। यहां भूकंप आया तो इससे पूरा उत्तर भारत प्रभावित होगा। इस संबंध में सेंस फ्रांसिस्को अमेरिका में हुई जियो फिजिकल यूनियन की कांफ्रेंस में भी चिंता व्यक्त की गई। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में कोरी चांगो भूकंप पट्टियां भी सक्रिय हो गई हैं।

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इस वजह से बना भूकंप का खतरा

Geothermal energy Can Cause earthquake in North India

हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट की यह पट्टी यूपी में सहारनपुर से शुरू होकर कन्याकुमारी तक चली जाती है। इस पूरी पट्टी के नीचे भूगर्भीय ऊर्जा भर रही है। विज्ञानियों की यहां 9 रिक्टर स्केल तक के भूकंप आने की आशंका के पीछे सबसे बड़ा कारण यह भी है कि वर्ष 1950

में असम के भूकंप के बाद इस हिमालयी क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है। उस वक्त असम में 8.7 रिक्टर स्केल का भूकंप आ चुका है। उसके बाद कोई बड़ा भूकंप नहीं आया। जिससे एचएफटी में ऊर्जा का जमाव हो रहा है। सेन फ्रांसिस्को में हुई जियो फिजिकल यूनियन की कांफ्रेंस 12 से 16 दिसंबर तक चली। 

1905 में हिमाचल को तबाह कर गया था भूकंप

Geothermal energy Can Cause earthquake in North India
1905 में कांगड़ा में आया भूकंप।

इसमें वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों ने इस संबंध में अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। वाडिया के भू भौतिकी समूह के अध्यक्ष और वरिष्ठ भूकंप विज्ञानी डा. सुशील कुमार ने इसमें ओरल प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि एचएफटी में हो रहे ऊर्जा के

जमाव से 10-12 सालों से बड़े भूकंप का खतरा बना हुआ है। संस्थान के विज्ञानियों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में कोरी चांगो क्षेत्र का फाल्ट सक्रिय हो गया है। वर्ष 1905 में कांगड़ा में 7.8 और किन्नौर में वर्ष 1975 में 6.8 तीव्रता का भूकंप आ चुका है। ये भूकंप पट्टियां अब फिर सक्रिय हो गई हैं।

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ये ‌कह रहे हैं वैज्ञानिक

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वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के अध्यक्ष डा. सुशील कुमार ने बताया‌ कि सीइसमिक स्टडी से पता चला है कि हिमालय का फ्रंट लाइन एरिया लॉक है। 1950 के बाद रिक्टर स्केल पर 8 से अधिक तीव्रता वाला भूकंप नहीं आया है। 

यह एनर्जी कहीं एकत्रित हो रही है। इससे बड़े भूकंप का अंदेशा है। वर्ष 1950 से अब तक छोटे 430 भूकंप आए हैं। इनमें 3 प्रतिशत ही एनर्जी निकल पाई है, बाकी जमा है। इसी से बड़े भूकंप की आशंका है।

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