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धंस रहे इस में गांव में पहुंचे भू-गर्वीय वैज्ञानिक, दहशत में लोग

Mon, 23 Jan 2017 01:41 PM IST
संजय भारद्वाज/अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
संजय भारद्वाज/अमर उजाला, नाहन (सिरमौर) Updated Mon, 23 Jan 2017 01:41 PM IST
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Geological Scientist visited sirmour distt village facing creep movement in houses

हिमाचल के सिरमौर जिले के पांवटा उपमंडल के अंतर्गत बनौर पंचायत के खतवाड़ गांव के मकानों में आई दरारों की वजह जानने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है। को उद्योग विभाग के ज्योलॉजिकल विंग की एक टीम गांव के निरीक्षण के लिए पहुंची। गांव के घरों और जमीन का निरीक्षण कर टीम ने मिट्टी के कुछ सैंपल भी भरे हैं। 

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प्रारंभिक जांच में भू-गर्वीय वैज्ञानिक जमीन धंसने की वजह जमीन की ऊपरी परत का खिसकना या धंसना मान रहे हैं। वैज्ञानिक भाषा में इसे क्रीप मूवमेंट कहते हैं। गौरतलब है कि गांव की जमीन धंस रही है। इस वजह से लगभग 18 घरों में दरारें आ गई हैं। इनमें से कई तहस-नहस भी हुए हैं। ‘अमर उजाला’ ने 19 जनवरी के अंक में ‘भूस्खलन से धंसा खतवाड़ गांव...’ शीर्षक के साथ यह मामला प्रमुखता से उठाया था।
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इस पर कड़ा संज्ञान लिया गया है। उद्योग विभाग के स्टेट ज्योलॉजिस्ट के आदेश पर विभाग की एक टीम जमीन धंसने के कारणों को जानने के लिए आज खतवाड़ पहुंची, जहां वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी और मकानों में आई दरारों की जांच की गई। वैज्ञानिकों ने प्रारंभिक जांच में पाया है कि गांव की जमीन में क्रीप मूवमेंट हो रही है, यानी जमीन की ऊपरी परत धीरे-धीरे खिसक रही है। 

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बर्फबारी के बाद मकानों में उबरी दरारें

Geological Scientist visited sirmour distt village facing creep movement in houses

हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह लंबी प्रक्रिया है। पिछले कई सालों से यह प्रक्रिया चल रही होगी। टीम के साथ आए ज्योलॉजिस्ट पुनीत गुलेरिया ने बताया कि अभी जमीन धंसने के कारणों के बारे में वह कुछ नहीं कह सकते। इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार

कर आला अधिकारियों को सौंपी जाएगी। उन्होंने माना कि गांव में जमीन धंस रही है। कई मकानों में दरारें भी आई हैं।  इस टीम में शिमला से इंस्पेक्टर राकेश कुमार और नाहन के इंस्पेक्टर मंगत राम भी शामिल थे। 

गांव के नजदीक ही डूंगा खड्ड बह रही है। तटीय क्षेत्र में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। धरती के मूव करने की वजह से डेढ़ दर्जन घरों के ढहने की आशंका जताई जा रही है। यह हालात पिछले पांच सालों से जारी हैं। इस साल बर्फबारी के बाद मकानों में और दरारें उबरी हैं। 

इसे कहते हैं क्रीप मूवमेंट
इस प्रक्रिया में धरती की सबसे ऊपरी सतह नीचे की तरफ मूव करना शुरू कर देती है। लिहाजा धरती के सबसे ऊपरी सतह पर बने ढांचे हिलना शुरू हो जाते हैं। इस तरह की यह प्रक्रिया लंबा प्रोसेस है। 

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