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गैस संकट : कई ढाबे बंद और मिठाइयां भी गायब, इंडक्शन-भट्ठी के सहारे बन रहे चाय-समोसे
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राजधानी को दस दिन में मिली सिर्फ 89 व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति, ढाबों, रेस्तरां और होटलों में कारोबार लगभग ठप
मिठाइयों से महकने वाले डिस्पले काउंटर खाली, डीजल की भट्ठियां भी मिल रहीं अब महंगी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में गैस संकट से ढाबों, होटलों, रेस्तरां, स्वीट शॉप, बेकरी आदि में कारोबार लगभग ठप हो गया है। शहर के लोअर बाजार में लजीज मिठाइयों से महकने वाले स्वीट शॉप के डिस्पले काउंटर अब खाली पड़े हैं। कारोबारी काम चलाने के लिए इंडक्शन, मिट्टी तेल-डीजल भट्ठी और कोयले से चाय और समोसे बना रहे हैं।
हालत यह है कि शहर में व्यावसायिक गैस सिलिंडर की आपूर्ति पूरी तरह से ठप है। बीते दस दिन के दौरान शहर को सिर्फ 89 सिलिंडर मिले हैं। ये भी अस्पतालों और स्कूलों को दिए गए हैं। हाल ही में कुछ सिलिंडर जेपी और बहारा यूनिवर्सिटी को दिए गए हैं। इसके अलावा होटलों और ढाबों में डिलीवरी बंद है। अमर उजाला की टीम ने रविवार को शहर के दो प्रमुख बाजार लोअर बाजार और मिडिल बाजार का दौरा किया। इस दौरान दोनों बाजारों में कई ढाबे, होटल बंद थे। जो ढाबे खुले थे वहां भी इंडक्शन और डीजल भट्ठी ही दिखे। कारोबारियों के अनुसार नई व्यवस्था से कारोबार मुश्किल हो गया है। इससे मिठाइयां या खाना बनाने में ज्यादा समय लग रहा है। गैस न होने के चलते एक दो चीजें ही बना पा रहे हैं। शहर के नामी नत्थू और मेहरू हलवाई की दुकानों पर जहां दिनभर कतारें लगी रहती थीं, अब वे लगभग खाली हैं। नत्थू हलवाई के डिस्पले काउंटर खाली हैं।
डीजल भट्ठी के रेट तीन गुना, इंडक्शन भी बाहर से मंगवा रहे
राजधानी में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति न मिलने के बाद कारोबारियों को इंडक्शन भी नहीं मिल रहे हैं। शहर की दुकानों में इनका स्टाॅक खत्म हो गया है। कारोबारियों को दूसरे राज्यों से इन्हें मंगाना पड़ रहा है। वहीं, डीजल भट्ठी अब 12 से 15 हजार रुपये में मिल रही है। पहले यह पांच हजार तक में मिल जाती थी।
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किसने क्या कहा
पहले बनती थी 32, अब इक्का दुक्का मिठाई
आम दिनों में लगभग 32 तरह की मिठाइयां बनाते हैं। अब गैस सिलिंडर न होने से सिर्फ दूध, जलेबी और इक्का दुक्का मिठाई ही बना पा रहे हैं। काम ठप हो गया है। कोयले की भट्ठी के सहारे काम चल रहे हैं। -रनबीर, कर्मचारी नत्थू हलवाई, लोअर बाजार
चौपट हो रहा है कारोबार
गैस सिलिंडर न मिलने से काम ठप हो रहा है। डीजल की भट्ठी भी अंबाला से मंगवाई है। पहले जो भट्ठी पांच हजार में मिलती थी, अब उसके रेट तीन गुना तक बढ़ गए हैं।
-गगन लखनपाल, संचालक मैहरू हलवाई
व्यावसायिक बंद, घरेलू में संकट नहीं
शहर में घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल कोई गैस संकट नहीं है। बुकिंग के बाद बाकी दिनों की तरह इन्हें गैस सिलिंडर दे रहे हैं। व्यावसायिक की आपूर्ति न मिलने से फिलहाल ढाबों और होटलों को सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। -नरेंद्र धीमान, जिला नियंत्रक, खाद्य आपूर्ति विभाग
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मिठाइयों से महकने वाले डिस्पले काउंटर खाली, डीजल की भट्ठियां भी मिल रहीं अब महंगी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में गैस संकट से ढाबों, होटलों, रेस्तरां, स्वीट शॉप, बेकरी आदि में कारोबार लगभग ठप हो गया है। शहर के लोअर बाजार में लजीज मिठाइयों से महकने वाले स्वीट शॉप के डिस्पले काउंटर अब खाली पड़े हैं। कारोबारी काम चलाने के लिए इंडक्शन, मिट्टी तेल-डीजल भट्ठी और कोयले से चाय और समोसे बना रहे हैं।
हालत यह है कि शहर में व्यावसायिक गैस सिलिंडर की आपूर्ति पूरी तरह से ठप है। बीते दस दिन के दौरान शहर को सिर्फ 89 सिलिंडर मिले हैं। ये भी अस्पतालों और स्कूलों को दिए गए हैं। हाल ही में कुछ सिलिंडर जेपी और बहारा यूनिवर्सिटी को दिए गए हैं। इसके अलावा होटलों और ढाबों में डिलीवरी बंद है। अमर उजाला की टीम ने रविवार को शहर के दो प्रमुख बाजार लोअर बाजार और मिडिल बाजार का दौरा किया। इस दौरान दोनों बाजारों में कई ढाबे, होटल बंद थे। जो ढाबे खुले थे वहां भी इंडक्शन और डीजल भट्ठी ही दिखे। कारोबारियों के अनुसार नई व्यवस्था से कारोबार मुश्किल हो गया है। इससे मिठाइयां या खाना बनाने में ज्यादा समय लग रहा है। गैस न होने के चलते एक दो चीजें ही बना पा रहे हैं। शहर के नामी नत्थू और मेहरू हलवाई की दुकानों पर जहां दिनभर कतारें लगी रहती थीं, अब वे लगभग खाली हैं। नत्थू हलवाई के डिस्पले काउंटर खाली हैं।
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डीजल भट्ठी के रेट तीन गुना, इंडक्शन भी बाहर से मंगवा रहे
राजधानी में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति न मिलने के बाद कारोबारियों को इंडक्शन भी नहीं मिल रहे हैं। शहर की दुकानों में इनका स्टाॅक खत्म हो गया है। कारोबारियों को दूसरे राज्यों से इन्हें मंगाना पड़ रहा है। वहीं, डीजल भट्ठी अब 12 से 15 हजार रुपये में मिल रही है। पहले यह पांच हजार तक में मिल जाती थी।
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किसने क्या कहा
पहले बनती थी 32, अब इक्का दुक्का मिठाई
आम दिनों में लगभग 32 तरह की मिठाइयां बनाते हैं। अब गैस सिलिंडर न होने से सिर्फ दूध, जलेबी और इक्का दुक्का मिठाई ही बना पा रहे हैं। काम ठप हो गया है। कोयले की भट्ठी के सहारे काम चल रहे हैं। -रनबीर, कर्मचारी नत्थू हलवाई, लोअर बाजार
चौपट हो रहा है कारोबार
गैस सिलिंडर न मिलने से काम ठप हो रहा है। डीजल की भट्ठी भी अंबाला से मंगवाई है। पहले जो भट्ठी पांच हजार में मिलती थी, अब उसके रेट तीन गुना तक बढ़ गए हैं।
-गगन लखनपाल, संचालक मैहरू हलवाई
व्यावसायिक बंद, घरेलू में संकट नहीं
शहर में घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल कोई गैस संकट नहीं है। बुकिंग के बाद बाकी दिनों की तरह इन्हें गैस सिलिंडर दे रहे हैं। व्यावसायिक की आपूर्ति न मिलने से फिलहाल ढाबों और होटलों को सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। -नरेंद्र धीमान, जिला नियंत्रक, खाद्य आपूर्ति विभाग