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Shimla News: फ्रासबीन के दाम 60 फीसदी तक घटे, किसान मायूस
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फ्रासबीन के दाम 60 फीसदी तक घटे, किसान मायूस
- फोटो : फ्रासबीन के दाम 60 फीसदी तक घटे, किसान मायूस
सोलन और ढली मंडी में 120 से घटकर 50 रुपये किलो तक पहुंचे दाम
जिले में इस बार फ्रासबीन की है बंपर पैदावार
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। फ्रासबीन के दाम घटने से किसानों में मायूसी है। जुन्गा तहसील के निचले क्षेत्रों से फ्रासबीन की खेप हर रोज प्रदेश की सबसे बड़ी सब्जी मंडी सोलन और ढली पहुंच रही है।
शुरुआती दौर में फ्रासबीन के अधिकतम दाम 120 रुपये प्रतिकिलो थे लेकिन शनिवार को सोलन और ढली सब्जी मंडी में फ्रासबीन 35 से 50 रुपये प्रतिकिलो तक बिकी। पिछले हफ्ते फ्रासबीन का रेट अधिकतम 70 रुपये रहा था। मई में अच्छी बारिश होने से इस बार फ्रासबीन की बंपर फसल हुई है। किसान प्रीतम ठाकुर, चंचल वर्मा और दौलत राम मेहता ने बताया कि यदि 50 रुपये तक फ्रासबीन का रेट स्थिर रहा तो किसानों को लाभ होगा अन्यथा घाटा उठाना पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि फ्रासबीन की दो किस्में होती हैं। इसमें एक किस्म झब्बे वाली होती है जो कम दाम पर बिकती है जबकि दूसरी फाल्गुनी (बूटिया) किस्म की फ्रासबीन होती है। इसके दाम बाजार में अच्छे मिलते हैं। प्रीतम ठाकुर के अनुसार फ्रासबीन सबसे कम अर्थात 60 दिन में तैयार हो जाती है जिसमें किसानों को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है।
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जुन्गा क्षेत्र में होती यह फसलें
जुन्गा क्षेत्र में फ्रासबीन, टमाटर, लहसुन और शिमला मिर्च की भारी मात्रा में पैदावार होती है। ट्रांसपोर्टर प्रदीप ब्रागटा के अनुसार प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से फ्रासबीन की भारी आपूर्ति होने से दामों में कुछ गिरावट आई है। सोलन और ढली में भी सबसे बढ़िया फ्रासबीन 35 से 50 रुपये प्रतिकिलो तक बिक रही है। फ्रासबीन का रेट उसकी क्वालिटी पर निर्भर कर रहा है। इसके बावजूद भी किसानों को फ्रासबीन औसतन अच्छे दाम मिल रहे हैं।
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जिले में इस बार फ्रासबीन की है बंपर पैदावार
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। फ्रासबीन के दाम घटने से किसानों में मायूसी है। जुन्गा तहसील के निचले क्षेत्रों से फ्रासबीन की खेप हर रोज प्रदेश की सबसे बड़ी सब्जी मंडी सोलन और ढली पहुंच रही है।
शुरुआती दौर में फ्रासबीन के अधिकतम दाम 120 रुपये प्रतिकिलो थे लेकिन शनिवार को सोलन और ढली सब्जी मंडी में फ्रासबीन 35 से 50 रुपये प्रतिकिलो तक बिकी। पिछले हफ्ते फ्रासबीन का रेट अधिकतम 70 रुपये रहा था। मई में अच्छी बारिश होने से इस बार फ्रासबीन की बंपर फसल हुई है। किसान प्रीतम ठाकुर, चंचल वर्मा और दौलत राम मेहता ने बताया कि यदि 50 रुपये तक फ्रासबीन का रेट स्थिर रहा तो किसानों को लाभ होगा अन्यथा घाटा उठाना पड़ेगा।
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उन्होंने बताया कि फ्रासबीन की दो किस्में होती हैं। इसमें एक किस्म झब्बे वाली होती है जो कम दाम पर बिकती है जबकि दूसरी फाल्गुनी (बूटिया) किस्म की फ्रासबीन होती है। इसके दाम बाजार में अच्छे मिलते हैं। प्रीतम ठाकुर के अनुसार फ्रासबीन सबसे कम अर्थात 60 दिन में तैयार हो जाती है जिसमें किसानों को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है।
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जुन्गा क्षेत्र में होती यह फसलें
जुन्गा क्षेत्र में फ्रासबीन, टमाटर, लहसुन और शिमला मिर्च की भारी मात्रा में पैदावार होती है। ट्रांसपोर्टर प्रदीप ब्रागटा के अनुसार प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से फ्रासबीन की भारी आपूर्ति होने से दामों में कुछ गिरावट आई है। सोलन और ढली में भी सबसे बढ़िया फ्रासबीन 35 से 50 रुपये प्रतिकिलो तक बिक रही है। फ्रासबीन का रेट उसकी क्वालिटी पर निर्भर कर रहा है। इसके बावजूद भी किसानों को फ्रासबीन औसतन अच्छे दाम मिल रहे हैं।