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हद है! दवाएं है फिर भी लगवा रहे कैमिस्ट के चक्कर

Mon, 28 Apr 2014 05:26 PM IST
Updated Mon, 28 Apr 2014 05:26 PM IST
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Free medicine facility is not available in Ayurvedic Hospital

राजधानी शिमला के आयुर्वेद अस्पताल में मरीजों के साथ रोजाना बड़ा घपला हो रहा है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को अस्पताल से ही निशुल्क दवा देने की व्यवस्था है लेकिन महकमे की मनाही के बावजूद कुछ डॉक्टर मरीजों को बाहर से दवा लिख रहे हैं।

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जो मरीज सरकारी सेवा में हैं, वे तो मेडिकल बिल का भुगतान ले लेंगे लेकिन आम आदमी कहां जाए? आखिर क्यों मरीजों को बाजार से दवा खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
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डॉक्टरों द्वारा लिखी जा रही दवाओं में से वही दवा या फिर उनका विकल्प मौजूद है। ‘अमर उजाला’ ने मौके पर जाकर पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दरअसल, मरीजों से बाहर से दवा मंगवाने के पीछे का खेल यह है कि इसमें डॉक्टरों का मोटा कमीशन बंधा है।

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ज्यादातर लोगों को लिख रहे बाहर की दवाएं

Free medicine facility is not available in Ayurvedic Hospital

अमर उजाला ने मौके पर जाकर देखा कि अस्पताल आ रहे मरीजों को क्या सुविधाएं मिल रही है। बल्देयां से आई कलावती ने बताया कि डॉक्टर ने उन्हें बाहर की दवाएं लिखी हैं। इनका बिल 484 रुपए है जबकि उनके पास अभी महज 200 रुपए है।

छोटा शिमला के मनोहर लाल ने बताया कि अस्पताल में बहुत कम दवाइंया मिलती है। ज्यादातर बाहर से लेनी पड़ती है।

छोटा शिमला की ही नीलम ने बताया कि उन्हें भी बाहर से दवाएं लिखी हैं लेकिन मैं सरकारी नौकरी में हूं। मुझे सारे पैसे वापस मिल जाएंगे।

अस्पताल की यह सफाई

Free medicine facility is not available in Ayurvedic Hospital
स्वास्थ्य (आयुर्वेद) उप निदेशक डॉ. अरुण उपाध्याय ने कहा कि अस्पताल में दाखिल मरीजों को आपातकालीन स्थिति में ही बाहर से दवा लिखी जा सकती है लेकिन ओपीडी में आने वाले सभी मरीजों को डॉक्टर केवल वही दवा लिख सकता है जो अस्पताल में मौजूद हो।

हमें आपके जरिये छोटा शिमला अस्पताल में चल रहे इस मामले का पता चला है।

निदेशक ने दावा किया कि वे खुद इस मामले की तफ्तीश करेंगे। बाहर से दवा लिखने का कोई मतलब नहीं बनता।
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