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पुलिस जवान बने गुरुजी, 10वीं के बच्चों को दे रहे मुफ्त कोचिंग

Mon, 01 Oct 2018 09:16 AM IST
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 01 Oct 2018 09:16 AM IST
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Free coaching to 10th class students by Himachal Police constables in Sirmour

कानून व्यवस्था संभालने के साथ-साथ हिमाचल पुलिस अब दसवीं के विद्यार्थियों को नि:शुल्क कोचिंग देकर उनमें शिक्षा की अलख जगा रही है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के धौलाकुआं स्थित पुलिस की छठी भारतीय आरक्षित वाहिनी (आईआरबी) ने अपने प्रांगण में ही नि:शुल्क पुलिस पाठशाला नाम से कोचिंग सेवा शुरू की है।

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इस पाठशाला में आसपास के गांवों के दसवीं के उन परिवारों के बच्चे आते हैं, जिनके पास इतने पैसे नहीं कि वे अपने बच्चों को बेहतर रिजल्ट लाने के लिए कोचिंग दिलवा सकें। ऐसे बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने के लिए बटालियन के ही चार सिपाहियों और एक डीएसपी ने गुरु की भूमिका संभाल ली है। बटालियन के कमांडेंट अजय कृष्ण शर्मा ने बताया कि पाठशाला में करीब सौ बच्चों को अंग्रेजी, गणित और विज्ञान विषय पढ़ाए जा रहे हैं।
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हर रविवार तीनों ही विषयों की एक-एक घंटे की क्लास लगती है। चूंकि अब उनके पास और बच्चों को बैठाने की क्षमता नहीं है, इसलिए उनके अभिभावकों को इंकार करना पड़ रहा है। शर्मा ने बताया कि इस कवायद के  जरिये आसपास के क्षेत्र के विद्यार्थियों की मदद के अलावा पुलिस और आम लोगों के बीच तालमेल व संबंध भी बेहतर होने की उम्मीद है।

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सौ से ज्यादा विद्यार्थी, आधी से ज्यादा छात्राएं

Free coaching to 10th class students by Himachal Police constables in Sirmour

बटालियन कमांडेंट बताते हैं कि परिसर के ही एक बड़े हॉल में नि:शुल्क पुलिस पाठशाला की शुरुआत की। शुरू के पहले दो रविवार बच्चों की संख्या काफी कम थी। लेकिन पुलिस स्टाफ के पढ़ाने की अच्छी शैली के चलते बच्चों ने एक-दूसरे को इसकी जानकारी दी और वर्तमान में दसवीं के 102 विद्यार्थी कोचिंग ले रहे हैं। इनमें भी आधी से ज्यादा छात्राएं हैं। 

25 रविवार में बांटा पूरा सिलेबस- तीनों विषय के पूरे सिलेबस को 25 रविवार के हिसाब से बांट दिया है। बच्चों को उसी के हिसाब से चैप्टर पढ़ाए जाते हैं और अगले रविवार के लिए होमवर्क दिया जाता है। लक्ष्य है कि 20 रविवार पूरे होने तक कोर्स पूरा करा लिया जाए। अंतिम पांच रविवार में रिवीजन व टेस्ट होंगे।

गुरु बनने से पहले जवानों को देनी पड़ी परीक्षा- पुलिस स्टाफ में पढ़ाने की काबिलियत परखने के लिए इच्छुक जवानों की स्क्रीनिंग कर उनकी पढ़ाने की काबिलियत को डमी क्लास के जरिये चेक किया गया। इसके बाद सिपाही अंकुश, योगेंद्र के अलावा रोहित और रजनीश का चयन विज्ञान और गणित पढ़ाने के लिए किया। बटालियन के डीएसपी बलदेव शर्मा एचपीएस बनने से पहले अंग्रेजी के अध्यापक थे, इसलिए अंग्रेजी पढ़ाने की जिम्मेदारी उन्होंने खुद ही ले ली।

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