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कर्मचारियों को पुरानी पेंशन नहीं मिलने तक पूर्व मंत्री सुशांत भी नहीं लेंगे विधायक पेंशन
Thu, 06 Aug 2020 05:45 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 06 Aug 2020 05:45 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल में नया क्षेत्रीय राजनीतिक दल बनाने की तैयारियों में जुटे पूर्व सांसद डॉ. राजन सुशांत ने प्रदेश के करीब डेढ़ लाख कर्मचारियों को पुरानी पेंशन नहीं मिलने तक अपनी विधायक पेंशन भी नहीं लेने का एलान किया है। वीरवार को शिमला स्थित अपने निवास पर प्रेस वार्ता में सुशांत ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों से नई पेंशन में शामिल कर्मचारी हजार से ढाई हजार की पेंशन लेकर सेवानिवृत्त होने को मजबूर हैं। केंद्र ने किसी भी राज्य सरकार को पुरानी पेंशन बंद करने को नहीं कहा है।
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यह फैसला राज्यों पर छोड़ा है। जयराम सरकार को पश्चिम बंगाल की तर्ज पर जनवरी 2004 से नियुक्त सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन के दायरे में लाना चाहिए। कहा कि प्रदेश की वित्तीय हालत खराब रहने तक सभी विधायकों की पेंशन भी बंद करनी चाहिए। सरकार को अपने खर्चों पर लगाम लगानी चाहिए। उम्र भर सरकार की सेवा में समर्पित कर्मचारियों को आर्थिक लाभ देते समय सरकार के हाथ खड़े हो रहे हैं, जबकि विधायकों को वेतन-भत्ते देने के लिए सरकार को समस्या नहीं है।
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कहा कि मंत्री-विधायक कर्मचारियों के मुकाबले 75 गुना ज्यादा वेतन-भत्ते और पेंशन ले रहे हैं। सरकार अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से भागने को आर्थिक तंगी का बहाना बना रही है। उन्होंने कहा कि वैसे तो वह 1982 में विधायक बनने के नाते पुरानी पेंशन स्कीम में आते हैं, लेकिन खुद भी नैतिकता के तहत इन कर्मचारियों के समर्थन में पेंशन नहीं लेंगे। सरकार ने एनपीएस कर्मचारियों की पेंशन बहाली की बात नहीं मानी तो प्रदेशव्यापी आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
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डॉ. सुशांत ने कहा कि मुख्यमंत्री पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली नहीं कर पाते हैं तो उन्हें राजभवन जाकर इस्तीफा दे देना चाहिए। कहा कि साफ छवि वाले नेताओं को साथ लेकर नवरात्रों में नए क्षेत्रीय दाल का गठन किया जाएगा। कहा कि सांसद होते हुए ही भी उन्होंने अन्ना हजारे आंदोलन का समर्थन किया था। प्रदेश में आम आदमी पार्टी के गठन में उनका भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रदेश में सियासी कारणों से आम आदमी पार्टी ने संभावनाएं होने के बाद भी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा।