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सीएम पर ही बरस पड़े पूर्व डीजीपी भंडारी

Thu, 15 May 2014 10:19 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 15 May 2014 10:19 AM IST
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former DGP Bhandari targeted cm virbhadra singh in phone tapping case

हाल ही में डीजीपी पद से रिटायर हुए आईडी भंडारी ने सरकार चलाने वाले आईएएस और आईपीएस अफसरों पर सीधा और तीखा हमला किया है। भंडारी ने बुधवार खुलासा किया कि पूर्व प्रधान सचिव (राजस्व) (वर्तमान में कार्यवाहक मुख्य सचिव) के खिलाफ धारा 118 की मंजूरी के बदले पैसे लेने के आरोप में दो केस दर्ज हैं।

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इस मामले में सरकार ने दलालों को तो गिरफ्तार कर लिया, लेकिन इनके खिलाफ विजिलेंस ने जांच क्यों बंद कर दी? भंडारी ने मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव सुभाष आहलूवालिया पर कहा कि भ्रष्टाचार के केस में वह जेल काट चुके हैं।
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उनके केस क्यों बंद हुए? भंडारी ने चुनौती दी कि यदि उनके आरोप झूठे हैं तो मानहानि का दावा करें। उन्होंने पूछा कि दागी अफसरों को शीर्ष पदों पर बिठाने की क्या मजबूरी है?

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फोन टैपिंग केस में गलत रिपोर्ट बनाई

former DGP Bhandari targeted cm virbhadra singh in phone tapping case

वीरभद्र सिंह टेबल बगिंग केस में चार्जशीटेड पूर्व डीजीपी भंडारी पिछले दिनों अपने रिटायरमेंट की भव्य दावत को लेकर चर्चा में आए थे। इस दावत में भाजपा नेता धूमल ही नहीं बल्कि विधानसभा अध्यक्ष समेत सत्तापक्ष के तमाम नेता शामिल हुए थे।

इस महाभोज के बाद भंडारी को अपनी ताकत का एहसास हुआ और बुधवार को शिमला में प्रेस कान्फ्रेंस बुलाकर उन्होंने सूबे के अफसरों पर हल्ला बोल दिया।

भंडारी ने पुलिस अफसरों को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि एडीजीपी सीआईडी एसआर मरडी और एसपी डीडब्ल्यू नेगी ने मुख्यमंत्री को गुमराह का फोन टैपिंग में झूठा राजनीतिक षड्यंत्र रचा। बगिंग केस में नेगी ने इंस्पेक्टर ओमप्रकाश से मिलकर गलत रिपोर्ट बनाई।

एक भी फोन टैप नहीं हुआ

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कहा, इस अफसर को बगिंग और स्नूपिंग में अंतर पता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि एक भी फोन अवैध टैप नहीं हुआ है। सीआईडी के कंप्यूटर सीज करने की सरकार की कार्रवाई गैर कानूनी थी। फोन टैपिंग में एफआईआर के एक साल बाद उनसे एक एसपी ने पूछताछ की। वह भी केवल दो फोन टैप करने को लेकर।

यदि मामला गंभीर था तो पहले पूछताछ क्यों नहीं की? भंडारी ने सवाल उठाया कि पीडब्ल्यूडी हर साल 500 करोड़ का तारकोल खरीदता है। इनमें से 100 करोड़ का तारकोल कहां जा रहा है? सरकार को जवाब देना चाहिए।

रिटायरमेंट पर चार्जशीट शेमफुल
भंडारी ने कहा कि उन्होंने अपने 34 साल के सेवाकाल में हर सरकार के साथ काम किया। रिटायरमेंट पर विदाई पार्टी के दिन उन्हें घर पर चार्जशीट दी गई। ये शेमफुल है। हालांकि 8 मई को उन्होंने चार्जशीट का जवाब दे दिया है।

मैं इन आरोपों से हैरान हूं : मित्रा

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कार्यवाहक मुख्य सचिव पी. मित्रा ने कहा कि मुझे इन आरोपों से हैरानी हुई है। यदि ऐसा कोई केस था तो मुझसे एक बार भी पूछताछ क्यों नहीं हुई? मुझे पिछली सरकार में ही प्रमोशन भी मिली।

जहां तक धारा 118 की मंजूरी का मामला है तो इसमें सेक्रेटरी मंजूरी नहीं देता, फाइल मुख्यमंत्री तक जाती है। सुभाष आहलूवालिया और एसआर मरडी से संपर्क नहीं हो पाया।

जबकि एसपी डीडब्ल्यूडी नेगी ने बताया कि कोई भी कार्य द्वेष भावना से नहीं किया गया। जो सच्चाई है वो तो सच्चाई ही है। मैं उनका आदर करता हूं और आगे भी करता रहूंगा।

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