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वीरभद्र सिंह: सपनों में पूर्वजों के आने के बाद महाकाल में बनवाया था मंदिर
Fri, 09 Jul 2021 01:37 PM IST
अरविन्द ठाकुर
राजकुमार सूद, अमर उजाला नेटवर्क, बैजनाथ (कांगड़ा)
राजकुमार सूद, अमर उजाला नेटवर्क, बैजनाथ (कांगड़ा)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 09 Jul 2021 01:37 PM IST
सार
वीरभद्र की रामपुर बुशहर रियासत के एक पूर्वज राजा महाकाल के भक्त थे। 2006 में महाकाल मंदिर के जीर्णोद्धार के समय योगीराज की पत्थर की मूर्ति (मोहरा) किसी दूसरे स्थान पर रख दी गई।
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2013 में मंदिर में वीरभद्र सिंह के पूर्वज योगीराज की मूर्ति स्थापित की थी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बैजनाथ के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर से वीरभद्र सिंह का गहरा संबंध रहा है। महाकाल मंदिर के परिसर में यज्ञशाला के समीप आज भी वीरभद्र के पूर्वजों का एक छोटा सा मंदिर है। इस मंदिर में वीरभद्र के पूर्वज राजा योगीराज की सिर रूपी पत्थर से बनी मूर्ति (मोहरा) स्थापित है। वीरभद्र की रामपुर बुशहर रियासत के एक पूर्वज राजा महाकाल के भक्त थे।
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2006 में महाकाल मंदिर के जीर्णोद्धार के समय योगीराज की पत्थर की मूर्ति (मोहरा) किसी दूसरे स्थान पर रख दी गई। इसके बाद से राजा वीरभद्र को महाकाल में विधिवत रूप से मूर्ति की स्थापना को लेकर उनके पूर्वज योगीराज सपने में आने लगे।
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2013 में पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के सहयोग से महाकाल मंदिर परिसर की यज्ञशाला के समीप एक छोटे पत्थर के मंदिर का निर्माण करके योगीराज के सिर रूपी पत्थर की मूर्ति को इसमें स्थापित किया। उस समय वीरभद्र ने महाकाल मंदिर में पूजा अर्चना की और इस मूर्ति की स्थापना करवाई।
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महाकाल के मंदिर के विकास में वीरभद्र का अहम योगदान रहा है। मंदिर पुजारी रामकुमार शर्मा के अनुसार रामपुर बुशहर रियासत के राजा योगीराज का सिर महाभारत के समय महाकाल में आकर गिरा था। योगीराज की तीन रानियों ने इस सिर के आगे अपने आप को सती कर लिया था। आज भी महाकाल में सती कुंड विराजमान है।