वन मंत्री ने ट्रेनिंग के लिए भेज दिया दागी अफसर का नाम
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वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने जर्मनी में होने वाली वन विभाग के अधिकारियों की ट्रेनिंग के लिए दागी अफसर का नाम भेज दिया है। यह अधिकारी वर्ष 2006 में हुए सीपीएमटी पेपर लीक कांड के आरोपी और आईएफएस गीताराम साहिबी हैं। जर्मनी में वन अधिकारियों के लिए ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स चार अक्तूबर से होनी है। इसके लिए साहिबी का नाम आने से वह एक बार फिर चर्चा में हैं।
सूत्रों के मुताबिक ट्रेनिंग के लिए उनके नाम को सरकार की मंजूरी के बाद से वन मंत्री और तत्कालीन पीसीसीएफ एसपी वासुदेवा में ठन गई थी। दरअसल, जर्मनी में 4 अक्तूबर से वन अधिकारियों की ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) होनी है। इसके लिए तत्कालीन पीसीसीएफ एसपी वासुदेवा ने सीसीएफ अर्चना शर्मा और रमन शर्मा का नाम प्रस्तावित किया।
फाइल सरकार के पास पहुंची तो वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने अर्चना शर्मा की जगह सीसीएफ ईको टूरिज्म गीताराम साहिबी का नाम अप्रूव कर दिया। इस पर पीसीसीएफ ने आपत्ति जताई और फिर अर्चना शर्मा का नाम प्रस्तावित किया, लेकिन सरकार ने सिफारिश खारिज कर गीताराम साहिबी और रमन शर्मा के नाम को अंतिम मंजूरी दी।
2006 के सीपीएमटी पेपर लीक कांड में आरोपी हैं आईएफएस गीताराम साहिबी
इसके बाद से मंत्री और पीसीसीएफ के बीच का विवाद सुर्खियों में है। विभागीय सूत्रों की मानें तो पीसीसीएफ की दलील थी कि चूंकि साहिबी प्रोजेक्टों से डील नहीं कर रहे हैं, इसलिए उन्हें नहीं भेजना चाहिए।
साथ ही यह भी हवाला दिया गया था कि साहिबी पुलिस की ओर से दायर एक मामले में चार्जशीटेड हैं। ऐसे में अंडर ट्रायल केस के आरोपी को बाहर नहीं भेजना चाहिए।
हालांकि, मंत्री की सख्ती के बीच प्रमुख सचिव वन तरुण कपूर ने कहा कि चूंकि साहिबी कभी किसी ट्रेनिंग के लिए नहीं गए, ऐसे में उन्हें भेजना सही है। वन मंत्री और पीसीसीएफ के बीच उपजे विवाद के बीच अब पुलिस भी चौकन्नी हो गई है।
पुलिस के आला अधिकारी भी इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि साहिबी ने कोर्ट से मंजूरी ली है या नहीं। साथ ही पुलिस खुद भी अपने स्तर से कोर्ट में उनके विदेश न जाने की कार्रवाई पर विचार कर रही है।