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Shimla News: जंगलों की उपज से आजीविका कमाने के गुर सीखेंगी वन सखियां

Mon, 12 Oct 2026 11:57 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Oct 2026 11:57 PM IST
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Forest friends will learn the tricks of earning livelihood from forest produce.
औषधीय पौधों की पहचान करने, जंगलों में पाई जाने वाली घास से टोकरियां बनाने का मिलेगा प्रशिक्षण
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हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जंगलों से मिलने वाली वन उपज ग्रामीण महिलाओं की आय का साधन बन सकती है। इसके लिए वन सखियों को वन उपज के संग्रहण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें महिलाओं को औषधीय पौधों की पहचान करने, जंगलों में पाई जाने वाली विशेष प्रकार की घास से टोकरियां बनाने और अन्य सजावटी वस्तुएं तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला में सोमवार को पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इसमें हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं भाग ले रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान, हैदराबाद और हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान के सहयोग से 16 अक्तूबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को गैर-काष्ठ वन उपज के माध्यम से आजीविका के अवसरों की जानकारी देना है। प्रशिक्षण के दौरान स्थानीय वन संसाधनों की पहचान, उनके सतत संग्रहण, संरक्षण और प्रसंस्करण की तकनीकें सिखाई जा रही हैं।
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संस्थान की निदेशक डॉ. मनीषा थपलियाल ने ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को महत्वपूर्ण बताया। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान के उपनिदेशक डॉ. ज्योति प्रकाश मोहंती ने कहा कि इससे ग्रामीण महिलाओं को आय बढ़ाने के नए अवसर मिलेंगे।
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स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उद्यम स्थापित करने पर जोर


प्रशिक्षण में वन धन योजना, वन उपज के प्रमाणन, घरेलू और निर्यात बाजारों तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उद्यम स्थापित करने की जानकारी दी जाएगी। प्रतिभागियों को शिलारू और बड़ागांव स्थित अनुसंधान केंद्रों का भ्रमण भी करवाया जाएगा। इसके अलावा, पॉटरहिल स्थित आर्बोरेटम में वन उपज से संबंधित प्रदर्शन गतिविधियों की जानकारी दी जाएगी।


इस पहल का उद्देश्य वन संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराना है।
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