रिपोर्ट में खुलासा, सबसे अधिक कम उम्र की लड़कियां रेप का शिकार
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फोरेंसिक लैब धर्मशाला की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सबसे अधिक कम उम्र की लड़कियां ही रेप का शिकार हुई हैं। ऐसी घटनाएं प्रदेश के उत्तरी क्षेत्र जोन कांगड़ा, चंबा, कांगड़ा में अधिक हुई हैं। फोरेंसिक लैब में दुराचार मामलों में अध्ययन रिपोर्ट बताती है कि ज्यादातर रेप के मामलों में पीड़िता के घर और आसपास के लोग शामिल होते हैं।
10 से 20 साल की लड़कियों से रेप का ग्राफ 54 प्रतिशत तक है। 0 से 10 साल की लड़कियों से 2.85 प्रतिशत, 11 से 20 साल की लड़कियों से दुराचार का ग्राफ 54.28 फीसदी है। 21 से 30 साल की महिलाओं से यह ग्राफ 20 प्रतिशत तक है।
31 से 40 वर्ष की महिलाओं से 11.42 फीसदी, जबकि 41 से 50 वर्ष की महिलाओं से दुराचार का ग्राफ 5.71 प्रतिशत है। 51 से 60 साल की महिलाओं से दुराचार 5.71 प्रतिशत है। छात्राओं के साथ दुराचार का ग्राफ 48.57 फीसदी रहा है। गृहणियों से दुराचार 17.14 प्रतिशत रहा।
सरकारी कार्यालयों में भी महफूज नहीं महिलाएं
सरकारी कार्यालयों में भी महिलाएं महफूज नहीं रही। इनसे दुराचार का ग्राफ 5.71 प्रतिशत है। मजदूरी करने आई महिलाएं या फिर निजी कार्यालयों में काम कर रही महिलाओं से दुराचार का ग्राफ 5.71 रहा है। उत्तरी रेंज में बाप की ओर से बेटी के साथ दुराचार करने के मामलों का ग्राफ 2.85 प्रतिशत रहा है।
साल दर साल दुराचार का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। जहां वर्ष 2012 में फोरेंसिक लैब में 35 मामले आए थे। 2013 में दुराचार के मामलों में बढ़ोतरी हुई। 70 मामलों पर रिपोर्ट लैब से सौंपी गई। 2014 में दुराचार का ग्राफ बढ़ा। इस वर्ष 90 मामले जांच को आए। 2015 में 120 दुराचार के मामले सामने आए थे। वर्ष 2016 में अभी तक 42 दुराचार के मामलों में रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है।
फोरेंसिक लैब के सहायक निदेशक डॉ. एसके पाल ने बताया कि दुराचार के मामलों में एक अध्ययन रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके अनुसार चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। साल दर साल दुराचार का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। अध्ययन रिपोर्ट में 10 से 20 साल की लड़कियां ज्यादा हवस का शिकार बन रही हैं।