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डॉ. स्मारिका: पुराने और अज्ञात शव की पहचान के लिए लें दांतों के सैंपल
Sun, 25 Sep 2022 09:10 PM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 25 Sep 2022 09:10 PM IST
सार
फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉक्टर स्मारिका ने कहा कि शरीर के अन्य अंग दांतो की तुलना में पहले सड़ जाते हैं। कई बार तन पर कपड़े भी नहीं होते हैं। ऐसे में शव की पहचान के लिए दांतों का सैंपल लिया जा सकता है।
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लघु नाटिका पेश करते एमबीबीएस प्रशिक्षु।
- फोटो : संवाद
विस्तार
चंबा मेडिकल कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक कार्यशाला के तीसरे एवं अंतिम दिन रविवार को नेपाल की फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉक्टर स्मारिका धाहल ने वर्चुअल माध्यम से कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने कहा कि पुराने और अज्ञात शव की पहचान करने के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञ उसके दांतो का सैंपल ले सकते हैं। शरीर के अन्य अंग दांतो की तुलना में पहले सड़ जाते हैं। कई बार तन पर कपड़े भी नहीं होते हैं। ऐसे में शव की पहचान के लिए दांतों का सैंपल लिया जा सकता है।
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इसी दौरान उत्तर प्रदेश के फोरेंसिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर मुकेश यादव ने वर्चुअल माध्यम से बताया कि अस्पताल में सेवाएं देने वाले चिकित्सक के साथ अगर किसी मरीज का झगड़ा हो जाता है तो ऐसे मामलों में पुलिस मरीज की शिकायत पर सीधे चिकित्सक पर एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती। इसके लिए पहले वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम बनाई जाती है। यह टीम पूरे मामले की गहनता से छानबीन करके असलियत का पता लगाती है। उसके बाद अपनी रिपोर्ट पुलिस को सौंपती है।
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उसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगामी कार्रवाई कर सकती है। इसको लेकर उन्होंने देश के चिकित्सकों को जागरूक होने के लिए कहा। इसी तरह अन्य फोरेंसिक एक्सपर्टों ने भी कार्यशाला के समापन पर अपने शोध पत्र पढ़े। कार्यशाला के समापन मौके पर सभी विशेषज्ञों को आयोजन कमेटी की तरफ से प्रमाण पत्र, पुष्प गुच्छ और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
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एमबीबीएस प्रशिक्षुओं ने बच्चों के दुर्व्यवहार पर पेश की लघु नाटिका
समापन मौके पर बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को रोकने के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस प्रशिक्षुओं ने लघु नाटिका पेश की। इसके जरिये समझाया कि बच्चा किस प्रकार से दुर्व्यवहार का शिकार बनता है। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों को खासकर लड़कियों को गुड टच और बेड टच के बारे में जागरूक करना चाहिए। साथ ही ऐसे मामलों को छिपाने के बजाय पुलिस में देकर दोषी को सजा दिलवानी चाहिए।