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फोरलेन निर्माण में केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना बदला प्लान

Thu, 13 Dec 2018 11:11 AM IST
रितेश गुलेरिया, अमर उजाला, बिलासपुर
रितेश गुलेरिया, अमर उजाला, बिलासपुर Updated Thu, 13 Dec 2018 11:11 AM IST
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forelane construction plans changed without the approval of the govt in himachal

किरतपुर-नेरचौक फोरलेन नेशनल हाईवे निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के प्लान में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। एक शिकायत पर जांच के दौरान नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) की भू अधिग्रहण प्रक्रिया में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है।

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जांच पूरी होते ही वन विभाग ने एनएचएआई को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस मामले में शिकायतकर्ता फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि सारी प्रक्रिया मिलीभगत से अंजाम दी गई है।
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एनएचएआई और परियोजना निर्माण कर रही कंपनी ने जिले के अधिकारियों के साथ मिल कर भू अधिग्रहण के प्लान को बदल दिया। वे इस मुद्दे को 5 साल से उठा रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
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समिति अब आगे के फोरलेन के प्लान की भी जानकारी लेगी। उधर, सूत्रों ने बताया कि इस मामले में हाईवे की एलाइनमेंट में नौ ऐसे गांव भी जोड़ दिए गए, जो मूल प्लान का हिस्सा नहीं थे। 

यहां बदल दिया प्लान

forelane construction plans changed without the approval of the govt in himachal

किसी भी विकास परियोजना के लिए जमीन देने से पूर्व वन विभाग वन संपदा की निशानदेही करता है। किरतपुर-नेरचौक हाईवे के लिए भी बाकायदा प्लान बनाया गया था, जिसमें निर्माण एजेंसी ने अपनी मर्जी के अनुसार बदल दिया है।

शिकायत मिलने के बाद वन विभाग ने जांच समिति गठित कर मामले की तहकीकात शुरू की थी। जांच में वन विभाग, राजस्व और भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई के अधिकारी शामिल थे। जांच में पता चला है कि करीब आठ स्थानों में प्लान में बदलाव किया गया है।

जांच के बाद टीम ने आरडी नंबर और खसरा नंबर जारी कर बदले गए प्लान की रिपोर्ट तैयार की है। जो बदलाव किया गया है, वह भारत सरकार की मंजूरी के बिना है। वन विभाग ने नोटिस में अनुमति प्रमाण पत्र मांगा है।

ऐसा न करने पर जिम्मेवार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। मामले में वन विभाग ने एफसीए एक्ट 1980 और सरकार को अंतिम शर्तों 26.10.2013 को जो अंतिम मंजूरी दी है, उसके तहत कार्रवाई की जाएगी।

डीएफओ सरोज भाई पटेल ने बताया कि जांच के दौरान भू-अधिग्रहण प्लान में बदलाव पाया गया है। जरूरी कार्रवाई की जा रही है। वन विभाग की जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार जिन नौ गांवों की भूमि को अनधिकृत

रूप से शामिल किया गया है, उनके पास से कुल 15 किलोमीटर लंबी सड़क बननी थी। एनएचएआई ने पौने चार किलोमीटर के क्षेत्र में प्लान के बाहर जाकर काम किया है। जबकि ऐसा करने से पूर्व भारत सरकार की ओर से अनुमति जरूरी है।

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