Himachal: पुरानी पेंशन बहाली के लिए वर्ष 2015 से छिड़ा कर्मचारी आंदोलन, जानें कब क्या हुआ
पुरानी पेंशन बहाली के लिए वर्ष 2015 से कर्मचारी आंदोलन छिड़ा और हिमाचल में चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद जिलों में चला क्रमिक अंशन बंद किया गया। इस दौरान जिला और प्रदेश स्तर पर रैलियों का आयोजन भी किया गया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली के लिए वर्ष 2015 से कर्मचारी आंदोलन छिड़ा और हिमाचल में चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद जिलों में चला क्रमिक अनशन बंद किया गया। इस दौरान जिला और प्रदेश स्तर पर रैलियों का आयोजन भी किया गया। इसमें प्रदेश भर के कर्मचारी बराबर हिस्सा लेते रहे।
- एनपीएस कर्मचारियों की कब कहां रैली और अनशन
1. वर्ष 2015 से प्रदेशभर में कर्मचारियों को एकजुट किया गया।
2. 25 जुलाई, 2017 को शिमला सचिवालय के बाहर रैली हुई।
3. 30 अप्रैल, 2017 और 26 नवंबर को दिल्ली रामलीला मैदान में रैली।
4. दिसंबर, 2018 को धर्मशाला में रैली।
5. 15 फरवरी, 2019 में शिमला चौड़ा मैदान में रैली।
6. वर्ष 2020 में कोविड के दिशा-निर्देशों का पालन कर जिलों में रैलियां हुईं।
7. 3 मार्च, 2022 को पेंशन व्रत रखा गया।
8. 11 दिसंबर, 2021 को धर्मशाला में 50,000 कर्मचारियों की रैली।
9. 23 फरवरी से 3 मार्च तक मंडी से शिमला तक पद यात्रा की।
10. 3 मार्च, 2022 को शिमला सहित छह जिलों में रैली हुई।
11. 13 अगस्त, 2022 को शिमला सहित छह जिलों में रैलियां हुईं।
12. 13 अगस्त, 2022 से क्रमिक अनशन चला और चुनाव आचार संहिता के कारण अनशन खत्म किया।
भाजपा सरकार ने पुरानी पेंशन की मांग पर किया कर्मचारी उत्पीड़न : वीरेंद्र
हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी मंच के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान, मुख्य सलाहकार विनोद कुमार और महामंत्री हीरा लाल ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाल करके सरकार ने कर्मचारी हितों की रक्षा की है। उनका कहना है कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग करने वाले मंच के नेताओं का पूर्व भाजपा सरकार ने उत्पीड़न किया है और प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में जानबूझकर उनका तबादला किया गया। संयुक्त कर्मचारी मंच के नेताओं ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मांग की है कि सरकार ने कर्मचारियों के हितों में फैसला लेकर पुरानी पेंशन बहाल की है। अब मंच से जुड़े नेताओं का उत्पी़ड़न भी तुरंत बंद किया जाए।
पुरानी पेंशन बहाली का फैसला सराहनीय : एसोसिएशन
हिमाचल प्रदेश पेंशन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष आत्माराम शर्मा, महामंत्री हुकम चंद ठाकुर, वरिष्ठ उपप्रधान हरीश वर्मा ने मुख्यमंत्री के पुरानी पेंशन बहाली के फैसले को सराहनीय करार दिया है। एसोसिएशन के नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने घोषणापत्र के वादे के मुताबिक पहली कैबिनेट में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इससे पेंशनरों और कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। उनका कहना है कि हम इसका स्वागत करते हैं।
हिमाचल में पुरानी पेंशन योजना कागजों तक सीमित न रहे : शाद
मार्क्सवाद कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव डॉ. ओंकार शाद ने पुरानी पेंशन बहाली के वर्तमान प्रदेश मंत्रिमंडल के फैसले को कर्मचारी हित में करार दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि हिमाचल में पुरानी पेंशन योजना लागू करने का मामला सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नई पेंशन का केंद्र के पास जमा कर्मचारियों का पैसा वापस लेने को दबाव डाला जाए, ताकि कर्मचारियों को उनकी धनराशि मिल सके।
उनका कहना है कि नई पेंशन लागू करने के बाद पेंशन के नाम पर काटी गई धनराशि केंद्र सरकार के पास भेजी गई थी, जो हजारों करोड़ जमा हुई है। वर्तमान सरकार पुरानी पेंशन बहाली सही तरीके से लागू करे और यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे।
सोशल मीडिया पर छाई रही पुरानी पेंशन बहाली
हिमाचल में पुरानी पेंशन बहाली का मामला शुक्रवार को दिनभर सोशल मीडिया पर छाया रहा। फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने इससे संबंधित पोस्ट अपडेट किए। मुख्यमंत्री सुक्खू का प्रदेश के कर्मचारियों को लोहड़ी के दिन बड़ा तोहफा देने के लिए आभार जताया गया। पूर्व की भाजपा सरकार को इस मुद्दे की अनदेखी करने पर सोशल मीडिया पर खूब घेरा भी गया।
कर्मचारी संगठनों ने पुरानी पेंशन बहाली के लिए बीते वर्षों के दौरान किए गए संघर्ष से संबंधित फोटो भी शेयर किए। कई कर्मचारियों ने आज के दिन को हिमाचल के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से याद रखे जाने की बातें भी सोशल मीडिया पर लिखीं। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को बॉलीवुड फिल्म नायक के हीरो अनिल कपूर की संज्ञा भी दी। कर्मचारियों ने लिखा कि मुख्यमंत्री सुक्खू धड़ाधड़ प्रदेश के हित में बड़े फैसले कर रहे हैं।