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Shimla News: राजधानी में पहली बार टैक्स डिफाल्टरों के होटल-दुकानें सील करेगा निगम

Mon, 16 Feb 2026 11:33 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Feb 2026 11:33 PM IST
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For the first time in the capital, the corporation will seal hotels and shops of tax defaulters.
शहर में कई नामी होटलों और कारोबारियों ने नहीं चुकाया है संपत्ति कर, लाखों में पहुंच चुकी है राशि
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अभी तक सिर्फ बिजली-पानी के कनेक्शन काटता था नगर निगम, अब संपत्तियां ही सील करने की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी शिमला में संपत्ति कर न चुकाने वालों पर अब नगर निगम सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। बार-बार नोटिस जारी करने के बावजूद टैक्स जमा न करने वाले होटल और दुकान मालिकों की संपत्तियां सील की जाएंगी। इसके लिए नगर निगम ने टैक्स डिफाल्टरों की सूची तैयार कर ली है। निगम को करीब 10 करोड़ का संपत्ति कर वसूलना बाकी है। इस पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम के अनुसार शहर में पहली प्रॉपर्टी टैक्स न देने पर होटलों और दुकानों को सील किया जाएगा। सबसे पहले उन डिफाल्टरों पर कार्रवाई होगी, जिन पर लाखों रुपये का टैक्स बकाया है। निगम ने अब तक 350 से अधिक भवन मालिकों को नोटिस जारी किए हैं।
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नगर निगम को सरकारी कार्यालयों के अलावा एचपीटीडीसी के होटल और दुकानों से भी करोड़ों रुपये का टैक्स वसूलना है। टैक्स राशि जमा न होने से नगर निगम के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसी कारण निगम ने सख्त कदम उठाने का फैसला लिया है। निगम ने टैक्स बकाया रखने वाले सरकारी महकमों के सचिवों से भी पत्राचार किया है, लेकिन बजट जारी न होने के कारण कई विभाग टैक्स जमा नहीं कर पा रहे हैं।
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नोटिस जारी होने के बाद कुछ लोग टैक्स जमा करवाने पहुंचे हैं, लेकिन बड़ी राशि वाले सरकारी महकमे, होटल मालिक और कारोबारी अभी भी टैक्स नहीं दे रहे हैं। इससे नगर निगम का करोड़ों रुपये का राजस्व अटका हुआ है।
पर्यटन निगम पर 70 लाख बकाया
नगर निगम को एचपीटीडीसी से करीब 70 लाख रुपये का संपत्ति कर वसूलना है। इसके अलावा विली पार्क से भी लाखों रुपये लिए जाने हैं, जो सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) को देने हैं। शिक्षा विभाग और बिजली बोर्ड से भी लाखों रुपये का टैक्स बकाया है।

क्या कहते हैं अधिकारी
नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने बताया कि जिन विभागों से टैक्स वसूला जाना है, उनके विभागाध्यक्षों को अवगत करवाया जा चुका है। संबंधित महकमों से पत्राचार भी किया गया है और विभागाध्यक्षों के समक्ष अलग से यह मामला उठाया गया है।
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