जेएंडके में बाढ़ से हिमाचली सेब की बढ़ी डिमांड
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जम्मू-कश्मीर में बाढ़ से ऐसे हालात बने हैं कि वहां के बागवान अपना सेब देश की मंडियों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। ऐसे में हिमाचली सेब की डिमांड बढ़ गई है। यही नहीं देश की मंडियों में दाम भी चोखे मिल रहे हैं।
सितंबर के दूसरे हफ्ते में कश्मीर का सेब मंडियों में पहुंच जाता है। इससे हिमाचली सेब को काफी टक्कर मिलती थी। इस बार कश्मीरी सेब ढूंढे नहीं मिल रहा।
यहां तक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र के सेब व्यापारी जो इन दिनों जम्मू कश्मीर में डेरा डाले रखते थे, वे कुल्लू-मनाली और शिमला में डटे हुए हैं। व्यापारी सीधे सेब गोदामों में जाकर खरीदारी कर रहे हैं।
सेब के दाम में वृद्घि
मांग बढ़ने से सेब कीमत में पिछले हफ्ते की तुलना प्रति पेटी ढाई सौ रुपये तक उछाल आया है। बताया जा रहा है कि कश्मीरी सेब को मंडियों में पहुंचने में अभी और पंद्रह दिन लग सकते हैं।
जब तक वहां हालात सामान्य नहीं होते और सड़कें बहाल नहीं होती तब तक कश्मीर का सेब बाहर नहीं आएगा। सेब खरीदने मनाली पहुंचे कानपुर के कारोबारी राजेश, पंजाब से पहुंचे प्रिंस ने बताया कि इस साल बाढ़ की वजह से कश्मीरी सेब नहीं खरीद पा रहे हैं।
कारोबार तो करना है, लिहाजा मनाली में ही सेब खरीद रहे हैं। हर दिन सेब दर्जनों ट्रक बाहरी मंडियों में भेजे जा रहे हैं।
कम सेब पहुंचने से बढ़ी डिमांड
पतलीकूहल सब्जी मंडी में मोहन फ्रूट कंपनी के संचालक मोहन ठाकुर ने बताया कि जम्मू कश्मीर में बाढ़ के कारण एक बार फिर घाटी की ओर सेब व्यापारियों ने रुख किया है। उन्होंने कहा कि मांग बढ़ने से कीमतों में भी इजाफा हुआ है।
आढ़ती एसोसिएशन शिमला के अध्यक्ष सुरेश चौहान का कहना है कि कश्मीर का सेब मार्केट में न आने से हिमाचली सेब को फायदा मिला है। बाढ़ के चलते कश्मीर से फसल मार्केट में नहीं पहुंच पा रही है। एक सप्ताह में प्रति पेटी सेब की कीमतों में ढाई सौ रुपये तक उछाल आया है।
ये रहे रेट
बीते सप्ताह प्रति पेटी सेब की कीमत: 1100 से 1500
इस सप्ताह प्रति पेटी सेब की कीमत: 1350 से 1700