हिमाचल के पांच दृष्टिबाधित छात्रों ने एक साथ नेट पास कर रचा इतिहास
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हिमाचल के पांच दृष्टिबाधित और दो दिव्यांग छात्रों ने एक साथ यूजीसी नेट पास कर इतिहास रच दिया है। एचपीयू के इन दृष्टिबाधित छात्रों ने टॉकिंग सॉफ्टवेयर मदद से यह मुकाम हासिल किया है। मन की आंखों से रास्ता तलाश कर ये मुकाम हासिल करने वाले इन छात्रों ने एक मिसाल पेश की है।
दिव्यांग छात्रों ने भी हौसले के पंखों के साथ सफलता की उड़ान भरी है। कुल्लू के दूष्टिबाधित अजय कुमार ने इतिहास विषय में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। अजय ने 75 फीसदी दृष्टिबाधित होने के बावजूद परीक्षा की ऑडियो बुक्स के जरिये तैयारी की।
शिमला में आसानी से ऑडियो बुक्स उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए उन्होंने देहरादून स्थित राष्ट्रीय संस्थान की सदस्यता ली। इस संस्थान ने उन्हें परीक्षा की तैयारी के लिए घर बैठे नि:शुल्क ऑडियो बुक्स भी दीं। सिरमौर के कोलर गांव के जसबीर सिंह लुबाना ने राजनीतिक विज्ञान में नेट पास किया है।
जसबीर ने बताया कि विजुअल एड की मदद से उन्होंने परीक्षा की तैयारी की। दृष्टिबाधित होने पर भी उन्होंने लैपटॉप पर टॉकिंग सॉफ्टवेयर की मदद से ई-बुक्स के जरिये पढ़ाई की। जसबीर जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशंस पर शोध करना चाहते हैं।
सिरमौर के ही अनुज कुमार ने अर्थशास्त्र विषय में नेट पास किया है। अनुज का कहना है कि सामान्य छात्रों की तरह किताबें न पढ़ पाने के कारण उन्होंने विजुअल एड की मदद से नेट की तैयारी की।
राज्य चुनाव आयोग की यूथ आइकन मुस्कान ने संगीत और विनोद शर्मा ने राजनीतिक विज्ञान में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा पास की। वहीं, मंडी के रहने वाले दिव्यांग विद्यार्थी सतीश ठाकुर ने राजनीतिक विज्ञान में नेट पास किया है।
सतीश के अनुसार वह तीन बार नेट और दो बार सेट की परीक्षा पास कर चुके हैं। उनका लक्ष्य कॉलेज में प्रोफेसर बनना है। वहीं, दिव्यांग प्रियंका ठाकुर ने कानून विषय में नेट पास किया है। विश्वविद्यालय कार्यकारिणी परिषद के सदस्य प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहा कि पांचों विद्यार्थियों ने यूजीसी नेट पास किया है।
विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में दृष्टिबाधित छात्रों के लिए टॉकिंग सॉफ्टवेयर वाले कंप्यूटर लगवाए हैं, जिससे इन छात्रों को पढ़ाई में मदद मिल सके।विश्वविद्यालय इन छात्रों की हरसंभव मदद को प्रयासरत है। छात्रों की यह उपलब्धि ऐतिहासिक है।