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फरवरी में पहली बार बिना बर्फ के सूना है ये विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल

Wed, 07 Feb 2018 10:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, केलांग (लाहौल-स्पीति)
अमर उजाला ब्यूरो, केलांग (लाहौल-स्पीति) Updated Wed, 07 Feb 2018 10:12 AM IST
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first time no snow in rohtang pass in february month

विश्व का प्रसिद्ध पर्यटन स्‍थल फरवरी में पहली बार बिना बर्फ के सूना है। दिसंबर से लेकर अप्रैल माह तक बर्फ से लकदक रहने वाले विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रोहतांग दर्रे पर इस बार बर्फ ही नहीं है। 

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समुद्र तट से 13050 फीट ऊंचाई पर रोहतांग में पहली बार ऐसी स्थिति बताई जा रही है। विशेषज्ञ इसे ग्लोबल वार्मिगिं से जोड़कर देख रहे हैं। उनके अनुसार यह पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि कुल्लू-मनाली में पर्यटन के लिए खतरे की भी घंटी है। 
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हिमालयन क्षेत्र में बर्फ बारी न होने से पूरा उत्तर भारत प्रभावित हो सकता है। कुल्लू और लाहौल को जोड़ने वाला रोहतांग दर्रा दिसंबर में बर्फबारी के बाद से बंद है। दिसंबर से मार्च तक बर्फबारी के मद्देनजर पर्यटकों और आम लोगों के लिए भी रोहतांग जाने पर पाबंदी है। 

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रोहतांग दर्रे को बिना बर्फ के देखकर हुई हैरानी

first time no snow in rohtang pass in february month

लेकिन बर्फबारी न होने के चलते हिमालयन माउंटेन बाइक नेटवर्क मनाली के दो युवक 4 फरवरी को साइकिल पर रोहतांग टॉप जा पहुंचे। इन युवकों में से एक नवीन बारोंगपा ने बताया कि फरवरी में रोहतांग दर्रे को बिना बर्फ के देखकर हैरानी हुई है। रोहतांग के एक हिस्से में बर्फ ही नहीं है। 

उधर, लाहौल के 88 साल के रिगजिन का कहना है कि इससे पहले कई बार फरवरी तक घाटी में बर्फबारी नहीं हुई, लेकिन रोहतांग दर्रा हमेशा बर्फ से लकदक रहा है। यह पहली बार देखा जा रहा है कि फरवरी में रोहतांग बिना बर्फ के खाली पड़ा है।

मूलिंग के 81 साल के टशी फुंचोग, चौखंग के 80 साल के फुंचोग अंगरूप, रंग्वे के अमरनाथ, रमेश और बरगुल के देवप्रकाश का कहना है कि उन्होंने महसूस किया है कि साल 2000 के बाद घाटी समेत रोहतांग में हिमपात लगातार कम हो रहा है। घाटी के लोगों की मानें तो जनवरी-फरवरी के दौरान दर्रे पर दस से बीस फीट तक बर्फबारी होती है।

बर्फबारी न होना खतरे की घंटी : कुनियाल

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जीबी पंत हिमालयन एवं पर्यावरण विकास शोध संस्थान मौहल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जेसी कुनियाल मानते हैं कि हिमालय रेंज में जनवरी-फरवरी में बर्फबारी न होना भविष्य के लिए खतरे की घंटी है।

इन्हीं दो माह होने वाली बर्फ बारी से ही ग्लेशियरों का सुरक्षा कवच मजबूत होता है। ऐसा ही रहा तो हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार तेज हो जाएगी। सर्दियों में बर्फ बारी न होने से पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने के साथ ही अंडरग्राउंड वाटर लेवल नीचे चला जाएगा।

जंगलों को जलाकर धुआं रोजाना वायुमंडल में प्रवेश कर रहा है उससे नमी वाले बादल सूख रहे हैं। मनाली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र ठाकुर का कहना है कि बर्फ बारी न होने से कुल्लू मनाली का पर्यटन कारोबार प्रभावित हो सकता है। अधिकांश सैलानी बर्फ के दीदार को रोहतांग दर्रा का रुख करते हैं। रोहतांग में बर्फबारी न होना चिंता की बात है।  

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