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भाजपा शासित नगर निगम में जनता के पैसों की हो रही है बंदरबांट

Sat, 06 Oct 2018 10:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 06 Oct 2018 10:03 AM IST
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Financial irregularities in municipal corporation shimla

भाजपा शासित नगर निगम में टैक्स के रूप में शहरवासियों से वसूले जा रहे पैसों की जमकर बंदर बांट हो रही है। विकास के नाम पर कई निर्माण कार्यों पर एस्टिमेट से डेढ़ से दोगुना बढ़ा दिया गया। यह नियमों के विपरीत है बावजूद इसके नगर निगम हाउस में इसे मंजूरी भी दी गई। छोटा शिमला, अनाडेल, टूटीकंडी, खलीनी समेत कई वार्डों में सड़कों को पक्का करने पर एस्टिमेट से ज्यादा पैसा खर्च किया जा रहा है।

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ऐसे में निगम प्रशासन का कटघरे में आना स्वाभाविक है। हर छोटी बात पर चीखने चिल्लाने वाले कई पार्षदों ने भी इस मुद्दे पर रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। इन सड़कों को पक्का करने के लिए निगम के जेई ने जो एस्टिमेट तैयार किया था नगर निगम अब इसका दोगुना भुगतान करने जा रहा है।  
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दावा किया जा रहा है कि मौके पर एस्टीमेट से ज्यादा काम हुआ है जिसके चलते लागत बढ़ गई है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या निगम के जेई मौके पर जाकर भी गलत एस्टिमेट तैयार कर रहे हैं या फिर किसी के इशारे पर ज्यादा काम दिखाया जा रहा है। बहरहाल जो भी हो, निगम के कुछ पार्षद दबी जुबान में इसे गलत तो करार दे रहे हैं लेकिन सदन में इन सभी सड़कों पर ज्यादा पैसा खर्च होने का मामला जब सामने आया तो इसका विरोध करने की जगह इसे पास कर दिया।
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नियमानुसार सिर्फ दस फीसदी डेविएशन की अनुमति
किसी भी सड़क या निर्माणकार्य की सबसे पहले एस्टिमेट रिपोर्ट बनती है। निगम का कनिष्ठ अभियंता स्तर का अधिकारी मौके पर जाकर इसे तैयार करता है। इसमें सड़क की लंबाई, चौड़ाई के अनुसार इस पर खर्च होने वाली राशि का अनुमान लगाया जाता है। इसके बाद इसे मंजूरी के लिए निगम प्रशासन को भेजा जाता है।

अंतिम मंजूरी के बाद इस राशि के आधार पर टेंडर होते हैं। नियमानुसार निर्माणकार्य में दस फीसदी तक की डेविएशन की अनुमति होती है। पार्षद भी सुविधानुसार काम में दस फीसदी तक का बदलाव कर सकते हैं। लेकिन अब जो मामले सामने आ रहे हैं, उसमें एस्टिमेट से लगभग दोगुनी राशि खर्च की जा रही है।
 

एस्टिमेट 3.83 लाख का, खर्चे 7.94 लाख

Financial irregularities in municipal corporation shimla
पंकज राय, नगर निगम आयुक्त

अनाडेल वार्ड के तहत आने वाली एक सड़क सड़क को पक्का करने के लिए निगम ने 3.83 लाख का एस्टिमेट तैयार किया था। लेकिन बाद में अचानक इसी काम की लागत दोगुना हो गई। अब इसके लिए 7.94 लाख रुपये देने की मंजूरी दी है। हालांकि, निगम पहले तैयार एस्टीमेट से ज्यादा काम का दावा कर रहा है, लेकिन सवाल उठता है कि आखिर काम इतना कैसे बढ़ गया कि लागत एकाएक दोगुना हो गई।

300 मीटर की सड़क पर खर्च हो गए 6.73 लाख
छोटा शिमला में भी तीन मीटर लंबी सड़क को बनाने के लिए 6.73 लाख रुपये खर्च होने का दावा है। हैरानी की बात है कि नगर निगम ने पहले खुद इस सड़क का एस्टिमेट 3.64 लाख रुपये का बनाया था। 15 जून को खुले टेंडर में अब अचानक इस सड़क की लागत लगभग दोगुना हो गई। ठेकेदार को 6.73 लाख का भुगतान किया जाएगा।

टुटीकंडी और खलीनी में भी एस्टिमेट फेल
टुटीकंडी वार्ड में भी कुछ सड़कों के लिए पहले 14.49 लाख का एस्टिमेट तैयार हुआ था, लेकिन यह भी 19.50 लाख पार कर गया। इसी तरह खलीनी में भी 320 मीटर लंबी सड़क पर 6.48 लाख की बजाय अब 9.55 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया जा रहा है। 

दस फीसदी डेविएशन की ही अनुमति होती है। इससे ज्यादा अंतर आने पर सदन से मंजूरी लेना जरूरी है। ऐसे कुछ मामले सामने आए हैं जिनमें ज्यादा डेविएशन हो गई। भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दे दिए हैं।- पंकज राय, नगर निगम आयुक्त

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