रामलीला में जब सीता बने प्राण, मदन पुरी राम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘सुनो-सुनो ए दुनिया वालो! बापू की यह अमर कहानी’ को लिखने वाले राजेंद्र कृष्ण 1942 में नगरपालिका की नौकरी छोड़कर मुंबई चले गए।
इन्होंने 1946 में फिल्म ‘आज की रात’ में गीत लिखे, जिससे हुस्न लाल, भगत राम की जोड़ी ने गीत दिया और सुरैया ने गीत गाए। ये बहुत प्रसिद्ध हुए। थियेटर के एक अन्य कलाकार विजय कश्यप भी शिमला से ही हैं।
विजय कश्यप दूरदर्शन से ‘तेनाली राम’, ‘मुल्ला नसीरूद्दीन’, ‘मालगुडी डेज’ आदि में काम कर चुके हैं। शिमला के सुधीर मट्टू ने भी दूरदर्शन में कुछ सीरियल किए हैं।
शिमला की रूबीना दिलैक भी छोटे परदे पर छाई हुई हैं। ‘ब्लू अंबरेला’ चर्चित फिल्म के कारण हिमाचल की श्रेया शर्मा भी खूब चर्चा में है।
प्राण 1939 में लाहौर चले गए
यहां उन्होंने राम लीला में सीता की भूमिका निभाई थी। राम की भूमिका मदन पुरी ने की थी, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा में अभिनेता बने। प्राण 1939 में लाहौर चले गए थे, जहां 1940 में उनकी फिल्म यमला जट रिलीज हुई।
1939 में ही प्राण माल रोड शिमला में ‘देहली स्टूडियो’ में सहायक कैमरामैन के तौर पर काम करते थे। यहां से वह लाहौर गए और सन् 1941 में पंचोली फिल्मज की ‘खानदान’ में नायक बने। नूरजहां इसमें नायिका थीं और मनोरमा खलनायिका।
इसके बाद प्राण मुंबई गए और खलनायक के तौर पर मुकाम हासिल किया। अनुपम खेर का बचपन शिमला में गुजरा। बॉलीवुड अभिनेता अमरीश पुरी शिमला में ही जन्में और उन्होंने यहीं अभिनय सीखा।
प्रेम चोपड़ा और प्रेम चोपड़ा का भी शिमला से नाता
इनके पिता स्थानीय नगरपालिका में थे। ये जाने-माने खलनायक बने। अभिनेता अमरीश पुरी शिमला के भार्गव कॉलेज में पढे़। वह शिमला में नाटकों में भाग लेते थे।
अमरीश पुरी, चमन पुरी और मदन पुरी तीनों शिमला में रहते थे। सिने जगत की दमदार शख्यिसत माने जाने वाले मनोहर सिंह शिमला के निकट क्वारा गांव से थे। गायकी के सरताज कुंदन लाल सहगल शिमला में रह चुके हैं।
मास्टर मदन और मास्टर मोहन का अधिकतर समय भी शिमला में बीता। मूक फिल्मों में अभिनय शुरू करने वाले पंडित विजय कुमार का नाम उल्लेखनीय है। वह भी शिमला में रहे। पत्रिका के वरिष्ठ संपादक यादविंदर सिंह चौहान ने कहा कि लेखकों के सहयोग से ही यह विशेषांक सचमुच संग्रहणीय बन गया है।