कृषि-बागवानी के लिए लाभकारी है फरवरी की बर्फबारी, ऐसे होगा फायदा
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प्रदेश में फरवरी में हो रही बारिश और बर्फबारी कृषि और बागवानी के लिए लाभकारी है। बागवान अपने बगीचों में मार्च तक तौलियों में खाद डालने का काम कर पाएंगे। गेहूं और मटर की फसल के लिए भी यह मौसम अच्छा है।
इस समय पौधे सुप्तावस्था में रहते हैं और कृषि फसलें तापमान बढ़ने के बाद बढ़नी आरंभ हो जाती हैं। डा. एसपी भारद्वाज कहते हैं कि 13 दिसंबर के बाद से फरवरी तक कई क्षेत्रों में सेब और अन्य फलदार पौधों के लिए 1500 से अधिक समय तक चिलिंग ऑवर मिल चुके हैं।
फरवरी में हो रहा हिमपात सेब के लिए शुभ संकेत है और इससे आगामी सीजन में अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। उनका कहना है कि दिसंबर से अभी तक रुक-रुक कर बारिश और बर्फबारी हो रही है।
बागवान इन बातों का रखें ध्यान
जब तक सेब के पौधों पर रस (सैप) चलना आरंभ न हो और सेब के पेड़ चांदी कली स्थिति में न आएं इससे 15- 20 दिन पहले तौलियों में खाद डालने का काम कर लें। बागवानों को इस बात खास ध्यान रखना होगा कि तौलियों में मिट्टी भुरभूरी होने पर ही खाद डालने का काम करें।
कई हिस्सों से बागवान पूछ रहे हैं कि बगीचों में साढ़े पांच फुट तक बर्फ है। ऐसे में खाद कैसे डालें। इस पर बागवानों से कहा गया है कि बर्फ को पिघलने तक इंतजार करें। तौलियों में कीचड़ रहते खाद न डालें।
उनका कहना है कि खेतों में इस समय गेहूं और मटर की फसल उगाई है। तापमान कम होने के कारण फसलों को बढ़ना रुका हुआ है। ऐसी स्थिति में बारिश और बर्फबारी फसलों के लिए अच्छी है। तापमान बढ़ने के साथ ही फसलों का बढ़ना शुरू होगा।