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Shimla News: बाल देखभाल संस्थानों में अब खेतों की पाठशाला
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जिले के 12 बाल देखभाल संस्थानों में बच्चे सीखेंगे प्राकृतिक खेती के गुर, विशेषज्ञों ने 3 केंद्रों का किया दौरा
आत्मा परियोजना के तहत मिलेगा खेती का प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले के 12 बाल देखभाल संस्थानों (जहां अनाथ, बेसहारा, जरूरतमंद बच्चों को रखा जात है) में अब बच्चों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक संस्थान में प्राकृतिक खेती के लिए स्थान चिह्नित किए जाएंगे।
कृषि विभाग की आत्मा (एटीएमए) परियोजना के तहत यह कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। विभाग के अनुसार, आत्मा परियोजना की टीम ने इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। हाल ही में उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद परियोजना की टीम ने सुन्नी, हीरानगर और टुटीकंडी स्थित तीन बाल देखभाल संस्थानों का दौरा किया। वर्तमान में कई संस्थानों में अवकाश चल रहा है। अवकाश समाप्त होते ही विभाग के अधिकारी सभी केंद्रों में प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेंगे। इसमें जिन संस्थानों में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, वहां प्राकृतिक खेती के लिए स्थान चिह्नित कर लिया है। वहीं जिन संस्थानों में भूमि की कमी होगी, वहां ग्रोइंग बैग के माध्यम से बच्चों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को सब्जी उत्पादन, बागवानी और प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। योजना के तहत एटीएमए परियोजना के सहायक तकनीकी प्रबंधक और खंड तकनीकी प्रबंधक नियमित रूप से इन संस्थानों का दौरा करेंगे और बच्चों को प्राकृतिक खेती का व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे। आत्मा परियोजना के निदेशक डीसी कश्यप ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को प्राकृतिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही उन्हें प्राकृतिक कृषि उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया भी सिखाई जाएगी ताकि उनमें कृषि के प्रति रुचि विकसित हो और वे पर्यावरण-अनुकूल खेती के महत्व को समझ सकें। उन्होंने कहा कि इस पहल से बच्चों में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होगी और वह भविष्य में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
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आत्मा परियोजना के तहत मिलेगा खेती का प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले के 12 बाल देखभाल संस्थानों (जहां अनाथ, बेसहारा, जरूरतमंद बच्चों को रखा जात है) में अब बच्चों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक संस्थान में प्राकृतिक खेती के लिए स्थान चिह्नित किए जाएंगे।
कृषि विभाग की आत्मा (एटीएमए) परियोजना के तहत यह कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। विभाग के अनुसार, आत्मा परियोजना की टीम ने इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। हाल ही में उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद परियोजना की टीम ने सुन्नी, हीरानगर और टुटीकंडी स्थित तीन बाल देखभाल संस्थानों का दौरा किया। वर्तमान में कई संस्थानों में अवकाश चल रहा है। अवकाश समाप्त होते ही विभाग के अधिकारी सभी केंद्रों में प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेंगे। इसमें जिन संस्थानों में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, वहां प्राकृतिक खेती के लिए स्थान चिह्नित कर लिया है। वहीं जिन संस्थानों में भूमि की कमी होगी, वहां ग्रोइंग बैग के माध्यम से बच्चों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को सब्जी उत्पादन, बागवानी और प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। योजना के तहत एटीएमए परियोजना के सहायक तकनीकी प्रबंधक और खंड तकनीकी प्रबंधक नियमित रूप से इन संस्थानों का दौरा करेंगे और बच्चों को प्राकृतिक खेती का व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे। आत्मा परियोजना के निदेशक डीसी कश्यप ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को प्राकृतिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही उन्हें प्राकृतिक कृषि उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया भी सिखाई जाएगी ताकि उनमें कृषि के प्रति रुचि विकसित हो और वे पर्यावरण-अनुकूल खेती के महत्व को समझ सकें। उन्होंने कहा कि इस पहल से बच्चों में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होगी और वह भविष्य में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
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