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Shimla News: शहर के बच्चों को सौ साल से शिक्षा दे रहा फागली स्कूल

Thu, 10 Jul 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jul 2025 11:59 PM IST
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Fagli school has been providing education to the children of the city for hundred years
वर्ष 1923 में 20 छात्रों से शुरू हुआ था स्कूल, आज 200 विद्यार्थी ग्रहण कर रहे शिक्षा
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अंग्रेज दंपती ने शुरू करवाया फागली में स्कूल दीक्षा सरोय
शिमला। राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल फागली का इतिहास सौ साल पुराना है। इस स्कूल की स्थापना अंग्रेज दंपति सर फ्रैंक नॉएस और लेडी नॉएस ने वर्ष 1923 में की थी।

सर फ्रैंक अंबाला डिवीजन के कमिश्नर थे और शिमला भी उस समय इसी डिवीजन का हिस्सा था जोकि पंजाब में आता था। सर फ्रैंक शिमला में अपने निजी खर्च से एक स्कूल को बनाना चाहते थे और जमीन की तलाश में थे। फागली में हिंदुस्तानी सरकारी कर्मचारियों के लिए कॉलोनी तैयार की जा रही थी। यह बात जब शिमला के अधिकारियों तक पहुंची तो उन्होंने सर फ्रैंक को प्रस्ताव दिया कि कॉलोनी में स्कूल का निर्माण कार्य करेें। इसके बाद कुछ ही समय में दो मंजिला इमारत बनकर तैयार हो गई। यह निजी स्कूल के तौर पर दो मंजिला भवन में शुरू हुआ था जिसमें ऊपरी मंजिल पर लड़कों के लिए प्राइमरी स्कूल और निचली मंजिल पर लड़कियों की कक्षाएं चलती थीं। शुरुआत में यहां 20 छात्र पढ़ते थे और आज यह स्कूल उत्कृष्ट विद्यालय बन गया है और अब 200 से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं।
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स्कूल के पहले अध्यापक मुख्य अध्यापक बलिराम शर्मा थे। शुरू में इस स्कूल का नाम सर फ्रैंक नॉयस स्कूल फॉर बॉयज और लेडी नॉयस स्कूल फॉर गर्ल्स रखा था। एमजी मेसी को लड़कियों के स्कूल की मुख्य अध्यापिका नियुक्त किया। आजादी के बाद स्कूल के संचालन के लिए बाद में फागली निवासियों ने एक समिति बनाई। स्कूल का खर्चा लोगों और शिमला नगर-निगम तथा सरकार के अनुदान से हुआ करता था। आजादी के बाद स्कूल को कुछ समय के लिए डीएवी स्कूल के अधीन कर दिया। इसके बाद पंजाब सरकार ने स्कूल को अधिकृत कर लिया। शिमला के हिमाचल में शामिल होने के बाद यह सरकारी स्कूल बन गया और 1997 से इसे उत्कृष्ट स्कूल का दर्जा मिला। राजभवन से नियंत्रक पद से सेवानिवृत्त स्थानीय निवासी सच्चिदानंद शर्मा ने कहा कि बलिराम शर्मा उनके दादा थे। उन्होंने स्कूल बनने से पहले ही बच्चों को मैदान में पढ़ाना शुरू कर दिया था। बाद में भवन बनने पर स्कूल में पढ़ाना शुरू किया।
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