मौन रहकर गुटबाजी थामने में जुटी प्रदेश भाजपा लेकिन अंतर्कलह जारी
पत्र बम के बाद लगातार हो रही बयानबाजी पर सख्त रुख अपनाते हुए भाजपा ने सभी को कुछ न बोलने की सलाह दी थी। भाजपा दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव में आपसी गुटबाजी का असर नहीं पड़ने देना चाहती। यही वजह है कि अब सिर्फ मौन रहकर गुटबाजी थामने और कांग्रेसी की मुखर गुटबाजी को चर्चा का मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है।
पार्टी सूत्रों की मानें तो भले ही नेताओं ने मौन धारण कर लिया है, लेकिन जिस तरह पुलिस को जांच दी गई और अब पुलिस की जांच धूमल गुट के माने जाने वाले पूर्व मंत्री रविंद्र रवि को जांच की जद में ले रही है। इससे साफ है कि अगर रवि पर आंच आई तो उसकी तपिश धर्मशाला और पच्छाद विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव पर पड़ता तय है।
भले ही आला नेता न कहें, लेकिन उनके फॉलोअर नेता की इच्छा के अनुसार ही काम करेंगे। हाल में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के ड्रीम प्रोजेक्ट सेवा ही संकल्प नाम से सीएम हेल्पलाइन की लांचिग पर इस जमीन के नीचे वाली गुटबाजी का असर दिख गया।
सोशल मीडिया पर हावी रहने वाली भाजपा की सरकार का कार्यक्रम सोशल मीडिया पर फ्लॉप हो गया। भाजपा आईटी सेल के पदाधिकारियों ने खानापूर्ति कर दी, जबकि निचले स्तर पर कार्यकर्ता शांत रहे। उधर, सरकार के आईटी सेल के अधिकारी कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे रहे, लिहाजा उस स्तर पर भी खास प्रयास नहीं हो पाए।
तालमेल की कमी और संगठन में सरकार के प्रति उदासीनता के बाद अब यह डर संगठन को भी सताने लगी है। प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती पहले ही इस गुटबाजी के असर को खत्म करने के लिए खुद कमान संभाल चुक हैं। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में बूथ स्तर के पदाधिकारियों से बैठक कर हालात भांपने और उन्हें संभालने में जुटे हैं। संगठन महामंत्री पवन राणा भी संगठन को मजबूत करने के लिए प्रयास में हैं।