Exclusive: हिमाचल में 9 साल बाद दोबारा लागू होगा अपार्टमेंट एक्ट, चेस्टर हिल प्रकरण के बाद सरकार का फैसला
Himachal Apartment Act 2026: हिमाचल प्रदेश सरकार ने 9 साल बाद अपार्टमेंट एक्ट को दोबारा लागू करने का फैसला किया है। एक्ट लागू होने के बाद सरकार बिल्डरों से एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेज (ईडीसी) की वसूली भी शुरू कर देगी। पढ़ें पूरी खबर...
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सोलन में चेस्टर हिल प्रोजेक्ट में कायदे कानूनों को ताक पर रखकर हुए निर्माण से सबक लेकर सरकार ने 9 साल बाद प्रदेश में अपार्टमेंट एक्ट को दोबारा लागू करने का फैसला किया है। एक्ट लागू होने के बाद प्रदेश में आवासीय परियोजनाओं के मनमाने निर्माण पर अंकुश लगेगा और बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) की वसूली शुरू होगी, जिससे प्रदेश की आय होगी। अपार्टमेंट एक्ट के तहत नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के निदेशक को नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की शक्तियां दी जाएंगी। नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने इसकी पुष्टि की है।
अमर उजाला ने चेस्टर हिल परियोजना में नियमों की अनदेखी को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की थी और ग्राउंड रिपोर्ट में भी मौके पर बरती जा रही अव्यवस्थाओं का खुलासा किया था, जिसके बाद अब राज्य सरकार ने बिल्डरों पर नकेल कसने के लिए अपार्टमेंट एक्ट पुन: लागू करने का फैसला लिया है। एक्ट लागू होने के बाद सरकार बिल्डरों से एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेज (ईडीसी) की वसूली भी शुरू कर देगी। इसकी दरें नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की ओर से प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से नगर निगम क्षेत्रों, नियोजित क्षेत्रों और विशेष क्षेत्रों के लिए अलग अलग तय की जाएंगी।
बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बिल्डरों से सार्वजनिक सुविधाओं सड़क, सीवरेज, पानी और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था के लिए ईडीसी लिया जाता है। प्रदेश में आवासीय परियोजनाओं (अपार्टमेंट) के तहत होने वाले निर्माण को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया हिमाचल प्रदेश अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट, 2005 सितंबर 2005 में लागू किया गया था। आवासीय परियोजनाओं से संबंधित पूरी प्रक्रिया पहले हिमुडा देखता था। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा 2016 में रेरा लागू किए जाने के बाद कानूनी एकरूपता लाने और दोहरे कानूनों से पैदा होने वाली जटिलताओं को खत्म करने के लिए अपार्टमेंट एक्ट को निरस्त कर दिया।
आवासीय परियोजनाओं में अब बिना पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के डवेलपर को ईसी (एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट) जारी नहीं किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए हैं। हाल ही में चेस्टर हिल प्रोजेक्ट में पानी और रास्ते की कमी को लेकर हुए विरोध के बाद यह फैसला लिया गया। अब पर्याप्त जल आपूर्ति और सड़क संपर्क सुनिश्चित होने पर ही प्रमाण पत्र मिलेगा। साथ ही पुराने और निर्माणाधीन प्रोजेक्टों की जांच के लिए विशेष कमेटी गठित होगी, जो कमियों की पहचान कर समाधान सुझाएगी।
प्रदेश सरकार ने प्रदेश में बनने वाले आवासीय प्रोजेक्टों के लिए बिल्डरों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। पंजीकरण होने के बाद यदि निर्माण के दौरान नियमों की अवहेलना होती है तो सरकार बिल्डर पर कार्रवाई करेगी।