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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन मामले की होगी जांच, निर्माण कार्य जारी
Fri, 17 Jul 2020 01:15 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 17 Jul 2020 01:15 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन का निर्माण कार्य रोकने के आदेश तो हो गए हैं लेकिन निर्माण कार्य अभी जारी है। दावा किया जा रहा है कि एनएचएआई के पास अभी पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी पत्र नहीं पहुंचा है। एनएचएआई के मंडी में कार्यरत परियोजना निदेशक अमन रोहिला ने बताया कि अभी उन्हें पत्र नहीं मिला है। यदि पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से कोई पत्र भेजा गया है तो इस सारे मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। बाकायदा इसकी जांच भी करवाई जाएगी।
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उन्होंने कहा कि फोरलेन के तहत होने वाला कटान वन विभाग ने किया है। इससे एनएचएआई का कोई ताल्लुक नहीं है। रोहिला के अनुसार रोड अलाइनमेंट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अगर बदलाव हुआ भी होगा तो इसका भी समाधान किया जाएगा। तीन माह तक कोरोना के कारण लॉकडाउन रहा। ऐसे में कोई व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकल पाया तो मंत्रालय को रिपोर्ट भेजना मुमकिन नहीं था। सरकार की योजनाओं में बिना मंजूरी कोई कार्य नहीं होता है। फोरलेन का भूमि अधिग्रहण रोड के हिसाब से ही हुआ है।
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क्या है पूरा मामला
3 जुलाई को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के देहरादून स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने हिमाचल सरकार को फोरलेन निर्माण कार्य बंद करने के लिए एक पत्र जारी किया है। पत्र में मंत्रालय की तरफ से साफ लिखा गया है कि राज्य सरकार से फोरलेन निर्माण कार्य की अलाइनमेंट में बदलाव, भूमि अधिग्रहण, पेड़ों के अवैध कटान, अवैध मक डंपिंग आदि पर कई बार रिपोर्ट मांगी गई। लेकिन राज्य सरकार ने एक भी बार मंत्रालय को इस विषय पर कोई रिपोर्ट नहीं भेजी। लिहाजा, मंत्रालय ने काम बंद करने के आदेश जारी किए हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फोरलेन निर्माण कार्य के तहत सुंदरनगर के भवाणा में अवैध मक डंपिंग की शिकायत मिली थी। इसके लिए बोर्ड ने उचित दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। अभी तक मंत्रालय की तरफ से कोई आदेश नहीं मिले हैं। आदेश आते हैं तो उनकी अनुपालना होगी। - अतुल परमार, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बिलासपुर
2013 में उठा था मुद्दा
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति बिलासपुर के उपप्रधान मदन लाल ने बताया कि समिति इस मुद्दे को साल 2013 से उठा रही है। फोरलेन निर्माण के लिए शुरू की गई गतिविधियों के साथ समिति विस्थापितों के हित के लिए प्रदेश, केंद्र सरकार, एनएचएआई और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याओं को रखती आई है। निर्माण कार्य में होने वाली अनियमितताओं को लेकर भी आवाज उठाती रही है। लेकिन इस सबकी पुष्टि होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।