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Shimla News: भूकंपरोधी निर्माण तनकीक में दक्ष होंगे इंजीनियर
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रुड़की में विभिन्न विभागों के 38 इंजीनियरों ने सीखीं निर्माण और डीपीआर बनाने की बारीकियां
प्राधिकरण ने किया है प्रशिक्षण के लिए करार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश के इंजीनियर, परियोजनाओं और भवनों के भूकंपरोधी निर्माण की बारीकियां सीखेंगे। इसके साथ उन्हें पुराने भवनों की भूकंपीय रेट्रोफिटिंग का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसको लेकर प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की के साथ करार किया है।
सरकार की योजना है कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत सभी इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जाए। इसके तहत पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम सीबीआरआई (सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) रुड़की में 28 जुलाई से 1 अगस्त तक आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के 38 इंजीनियरों ने भाग लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में इंजीनियरों को भूकंपीय रेट्रोफिटिंग और नए निर्माण कार्यों की भूकंपरोधी तकनीक के आधार पर (डीपीआर) डिटेल्ड प्राेजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के बारे में जानकारी दी गई। प्रदेश की आपदा प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए सरकार इंजीनियरों को प्रशिक्षित कर रही है। आने वाले दिनों में प्रदेशभर के विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे इंजीनियरों को भी इसी तरह से चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें लोक निर्माण विभाग, हिमुडा, एचपीआरआईडी समेत निर्माण कार्य से जुड़े सभी विभागों के इंजीनियरों को योजना के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा।
पुराने भवनों की होगी भूकंपीय रेट्रोफिटिंग
हिमाचल प्रदेश भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है। इसको लेकर प्रदेश सरकार भूकंपरोधी भवनों के निर्माण पर जोर दे रही है। प्रदेशभर में ऐसे ऐतिहासिक महत्व के भवनों को भी चिह्नित किया जा रहा है, जिनकी सुरक्षा के लिए मजबूती प्रदान करके सुरक्षित बनाया जा सके। इसके लिए पुराने भवनों की भूकंपीय रेट्रोफिटिंग की जाती है। यह भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में इमारतों और बुनियादी ढांचे को सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य भूकंप के दौरान संरचनाओं को होने वाले नुकसान को कम करना है, जिससे जीवन और संपत्ति की रक्षा की जा सके।
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प्राधिकरण ने किया है प्रशिक्षण के लिए करार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश के इंजीनियर, परियोजनाओं और भवनों के भूकंपरोधी निर्माण की बारीकियां सीखेंगे। इसके साथ उन्हें पुराने भवनों की भूकंपीय रेट्रोफिटिंग का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसको लेकर प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की के साथ करार किया है।
सरकार की योजना है कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत सभी इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जाए। इसके तहत पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम सीबीआरआई (सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) रुड़की में 28 जुलाई से 1 अगस्त तक आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के 38 इंजीनियरों ने भाग लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में इंजीनियरों को भूकंपीय रेट्रोफिटिंग और नए निर्माण कार्यों की भूकंपरोधी तकनीक के आधार पर (डीपीआर) डिटेल्ड प्राेजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के बारे में जानकारी दी गई। प्रदेश की आपदा प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए सरकार इंजीनियरों को प्रशिक्षित कर रही है। आने वाले दिनों में प्रदेशभर के विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे इंजीनियरों को भी इसी तरह से चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें लोक निर्माण विभाग, हिमुडा, एचपीआरआईडी समेत निर्माण कार्य से जुड़े सभी विभागों के इंजीनियरों को योजना के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा।
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पुराने भवनों की होगी भूकंपीय रेट्रोफिटिंग
हिमाचल प्रदेश भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है। इसको लेकर प्रदेश सरकार भूकंपरोधी भवनों के निर्माण पर जोर दे रही है। प्रदेशभर में ऐसे ऐतिहासिक महत्व के भवनों को भी चिह्नित किया जा रहा है, जिनकी सुरक्षा के लिए मजबूती प्रदान करके सुरक्षित बनाया जा सके। इसके लिए पुराने भवनों की भूकंपीय रेट्रोफिटिंग की जाती है। यह भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में इमारतों और बुनियादी ढांचे को सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य भूकंप के दौरान संरचनाओं को होने वाले नुकसान को कम करना है, जिससे जीवन और संपत्ति की रक्षा की जा सके।
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