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हिमाचल में पहली बार ईडी के निशाने पर नशे के सौदागर, मांगा संपत्तियों का ब्योरा

Sat, 28 Sep 2019 11:41 AM IST
अरविन्द ठाकुर प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 28 Sep 2019 11:41 AM IST
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Enforcement Directorate seeks record of drug smuggler property in himachal pradesh
प्रवर्तन निदेशालय - फोटो : फाइल फोटो

हिमाचल में नशे के सौदागर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निशाने पर आ गए हैं। ईडी ने पहली बार नशे के कारोबार से काली कमाई कर बनाई संपत्तियों को सीज करने की कवायद शुरू कर दी है। इस क्रम में ईडी ने पहली कार्रवाई शिमला के उस दंपती पर की है। इसे हाल ही में स्थानीय अदालत ने मादक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए बीस-बीस साल कैद और दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

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ईडी ने राजस्व विभाग से दंपती की हिमाचल में मौजूदा संपत्तियों का पूरा ब्योरा मांगा है। साथ ही उसने तस्कर दंपती के बैंक खातों वाले बैंकों से भी उनका पूरी बैंक डिटेल मांगी है। दरअसल, शिमला की बालूगंज पुलिस ने 25 मार्च, 2016 को टुटू में दीपराम के आवास से 16 किलो चरस और अफीम बरामद की थी। इस घटना को लेकर पुलिस ने दीपराम, उसकी पत्नी ऊषा, मेहर सिंह, अमन ठाकुर और विपिन को गिरफ्तार किया था।

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आरोपियों के खिलाफ  एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। जिस घर में अफीम व चरस मिली थी, वह घर ऊषा के नाम पर है। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। लंबी सुनवाई के बाद न्यायाधीश ज्योत्सना डढवाल की अदालत ने पति-पत्नी को 20-20 साल के कारावास की सजा सुनाई।

प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी में यह अब तक की यह सबसे बड़ी सजा है। इसी मामले में तीन अन्य दोषियों अमन, विपिन और मेहर सिंह को भी दोषी मानते हुए सजा सुनाई। चूंकि, पुलिस ने तस्कर की काली कमाई और उस कमाई से अर्जित संपत्तियों की न तो जांच की और न कोई कार्रवाई की।

इसलिए अब ईडी ने तस्कर दंपती की जांच शुरू कर दी है। यह कवायद ईडी ने इसलिए की है, ताकि वह यह जान सके कि तस्कर दंपती के पास कितनी संपत्ति है और वह किस तरह खरीदी गई है। इसके बाद ईडी अवैध रूप से अर्जित आय और उससे बनाई संपत्ति को ईडी प्रीवेंशन आफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत अटैचमेंट की कार्रवाई शुरू करेगी।

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