श्रम मंत्रालय से छिनेंगे देश के 304 स्वास्थ्य संस्थान
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श्रम मंत्रालय भारत सरकार की वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के तहत देश में चल रहे करीब 304 अस्पताल और डिस्पेंसरियां ईएसआईसी के दायरे में आएंगी। अगले महीने ईएसआईसी इन्हें टेकओवर कर सकती है। श्रम मंत्रालय ने सभी अस्पतालों को पत्र जारी किए हैं। श्रम मंत्रालय ने लाइम स्टोन एवं डोलोमाइट खदानों के श्रमिकों के लिए डिस्पेंसरियां और अस्पताल खोले हैं।
देश में 292 डिस्पेंसरियां और 12 अस्पताल हैं। सिरमौर जिले के सतौन में भी एक डिस्पेंसरी है। 30 जून तक अस्पतालों में मौजूद सुविधाओं, सामान सहित पूरे इन्फ्रास्ट्रक्चर की लिस्ट मांगी है। ऐसे में तय है कि अगले महीने तक तमाम अस्पताल ईएसआईसी के अधीन हो जाएंगे।
इससे देश के लगभग पांच लाख श्रमिक प्रभावित होंगे। डिस्पेंसरियों में चूना पत्थर और डोलोमाइट की खदानों में कार्य करने वाले श्रमिकों के मुफ्त इलाज की सुविधा है। ईएसआईसी के अधीन होने के बाद श्रमिकों के लिए यह सुविधा जारी रहेगी या नहीं, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। श्रमिकों में असमंजस की स्थिति है।
यह सुविधाएं देता है मंत्रालय
श्रम मंत्रालय श्रमिकों और उनके आश्रितों को निशुल्क दवाइयां देता है। हर वर्ष श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए अनुदान राशि भी जारी करता है। ईएसआईसी में अधीन होने पर पहले जैसी सुविधाएं मिलना मुश्किल है।
चूना पत्थर और डोलोमाइट खनन पट्टेदार एक रुपये प्रति मीट्रिक टन सेस के रूप में मंत्रालय के खाते में जमा करवाते हैं। ईएसआईसी एक्ट में मालिक को सैलरी का 4.65 प्रतिशत और श्रमिक को 1.65 प्रतिशत जमा करवाना पड़ेगा।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार (इलाहाबाद) के आयुक्त डा. एके सिन्हा ने बताया कि भारत सरकार डिस्पेंसरियों और अस्पतालों को ईएसआईसी के अधीन चलाने की तैयारी कर रही है।
खनन मजदूरों को ईएसआईसी एक्ट में लिया जाएगा या नहीं, इस पर अभी स्पष्ट नहीं है। हिमाचल में एकमात्र डिस्पेंसरी सतौन में है। वर्तमान में श्रम मंत्रालय 30 रुपये प्रति ओपीडी भारत सरकार से ले रहा है। ईएसआई प्रति ओपीडी 200 रुपये लेगा।