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HPTDC: कर्मचारी संघ बोला, बोले- बाली ने अपने विधानसभा क्षेत्र के ही 70 लोग लगा दिए अनुबंध पर

Sat, 23 Nov 2024 06:53 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 23 Nov 2024 06:53 PM IST
सार

कर्मचारी संघ ने होटलों को बंद करने के फैसले को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की भी बात कही है। संघ ने आरोप लगाया है कि बाली ने अपने विधानसभा क्षेत्र के ही 70 लोग अनुबंध पर लगा दिए हैं।

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employees got angry, accused of conspiracy to hand over HPTDC hotels to private hotels
हिमाचल पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध एचपीटीडीसी कर्मचारी संघ ने प्रदेश सरकार पर पर्यटन निगम के होटलों को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। निगम के चेयरमैन रघुवीर सिंह बाली को पद से हटाने की मांग की है। कर्मचारी संघ ने होटलों को बंद करने के फैसले को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की भी बात कही है। संघ ने आरोप लगाया है कि बाली ने अपने विधानसभा क्षेत्र के ही 70 लोग अनुबंध पर लगा दिए हैं।

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शनिवार को होटल होलीडे होम में प्रेस वार्ता के दौरान कर्मचारी संघ के प्रधान हुकुम राम, महासचिव राजकुमार, कार्यकारी अध्यक्ष राजीव सोनी, बीएमएस उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा, सेवानिवृत कर्मी डावेराम और श्यामानंद ने कहा कि निगम प्रबंधन ने कोर्ट में होटलों के घाटे को लेकर गलत रिपोर्ट दी गई है।
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सिर्फ ऑक्यूपेंसी से ही होटलों की कमाई का आकलन नहीं हो सकता, बैंक्वेट हॉल, कैफे, रेस्टोरेंट और एंट्री फीस से भी करोड़ों की कमाई होती है। फागू, खड़ापत्थर और दाड़लाघाट के जिन होटलों को बंद करने के आदेश हुए हैं, वहां शादियों की बुकिंग हो चुकी है और करोड़ों रुपये अग्रिम जमा हो चुके हैं। कर्मचारी संघ पदाधिकारियों ने सरकार की नीतियों को एचपीटीडीसी की कमजोर माली हालत के लिए जिम्मेदार बताया। होम स्टे पाॅलिसी से नुकसान हो रहा है। सरकारी कार्यक्रमों की पेमेंट समय से नहीं दी जाती। सरकार से निगम को 50 करोड़ ग्रांट देने का आग्रह किया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

कहा कि 5 नवंबर को हुई निदेशक मंडल की बैठक में होटलों को निजी हाथों में सौंपने को लेकर चर्चा हुई है और फैसले भी लिए हैं। निगम चेयरमैन कर्मचारियों से बात करने को तैयार नहीं हैं। पिछली सरकार में होटलों के रखरखाव के लिए जो पैसा एडीबी के तहत मिला था, वह इस सरकार ने सत्ता में आते ही वापस ले लिया। कोरोना काल और प्राकृतिक आपदा से निगम को नुकसान हुआ। इस कारण पेंशनरों को वित्तीय लाभ जारी नहीं हो पा रहे। कर्मचारी संघ ने एलान किया कि अगर सरकार का ऐसा ही रवैया रहा तो भारतीय मजदूर संघ के सहयोग से सभी कर्मचारी आंदोलन पर उतरने से भी संकोच नहीं करेंगे।

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विधानसभा में 80 की चाय 12 में, कैसे होगी कमाई
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सालभर निगम कमाई करता है और वीआईपी की आवभगत में लुटा देता है। विधानसभा में 80 रुपये की चाय 12 रुपये में देनी पड़ती है। एचपीटीडीसी लुटाने का जरिया बन गया है। निगम की संपत्ति का प्रयोग सिर्फ सैलानियों के लिए नहीं, बल्कि वीवीआईपी अतिथियों के लिए हो रहा है। कोरोना काल में निगम के होटलों को क्वारंटीन सेंटर के तौर पर भी इस्तेमाल किया गया।

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