HRTC कर्मचारी नेताओं की बर्खास्तगी पर भड़के महासंघ, बैठक बुलाने का फैसला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल पथ परिवहन निगम के 30 कर्मचारी नेताओं को नौकरी से बर्खास्त करने पर सरकार से मान्यता प्राप्त महासंघ, शिक्षक महासंघ और बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन और अन्य संघ भड़क गए हैं। इन्होंने विभागों, निगम और बोर्डों के कर्मचारी संगठनों की बैठक बुलाने का फैसला लिया है।
कहा कि आज एचआरटीसी के कर्मचारी नेताओं पर गाज गिरी है, कल अन्य संगठनों पर भी ऐसी कार्रवाई हो सकती है। कर्मचारी नेताओं की बर्खास्तगी से कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा है।
अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अलावा राजकीय शिक्षक महासंघ और बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन एचआरटीसी कर्मचारियों के पक्ष में खड़ी हो गई है। यूनियन के नेताओं ने कहा कि सरकार मांगों को पूरा करे, कर्मचारियों को धरना-प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कर्मचारियों के लिए आगे कुआं और पीछे खाई है। न तो मांगें पूरी हो रही हैं और अगर प्रदर्शन करें तो कार्रवाई की जा रही है।
हिमाचल में कर्मचारी एकजुट : जोगटा
अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष एसएस जोगटा ने कहा कि जब से कांग्रेस सरकार सत्ता मेें आई है, तब से एचआरटीसी के कर्मचारी मांगें उठा रहे हैं। कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं होंगी तो उनका प्रदर्शन करना वाजिब है।
उन्होंने परिवहन मंत्री जीएस बाली के इस कड़े फैसले की निंदा की है। सरकार से कर्मचारियों को पुन: नौकरी पर बुलाने की मांग की है। उन्होंने एचआरटीसी के कर्मचारी नेताओं को आश्वासन दिया कि महासंघ उनके साथ खड़ा है।
सबके लिए लड़े हैं ये कर्मचारी नेता
बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के महासचिव हीरालाल वर्मा ने कहा कि कर्मचारियों को बर्खास्त करने का मामला दुर्भाग्यपूर्ण है। उम्मीद है कि हाईकोर्ट मामले पर संज्ञान लेकर उनके पक्ष में फैसला लेगा। कहा कि संगठन कर्मचारियों मांगें मनवाने को ही बनाए जाते हैं। ये कर्मचारी अपने हित के लिए नहीं, बल्कि सभी कर्मचारियों के लिए लड़ते हैं।
कोई चारा न बचे तो सड़क पर उतरता है कर्मचारी : वीरेंद्र
राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि एचआरटीसी कर्मचारियों को बर्खास्त करने का निर्णय सही नहीं है। कर्मचारियों के पास जब मांगें मनवाने का कोई चारा नहीं बचता, तब सड़क पर उतरते हैं। यह कर्मचारियों के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने एचआरटीसी के कर्मचारियों को आश्वस्त किया है कि वह इस लड़ाई में उनके साथ हैं।
पूर्व सीएम शांता भी भुगत चुके हैं खामियाजा : ठाकुर
राज्य विद्युत परिषद तकनीकी कर्मचारी संघ की समन्वय समिति के प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल ठाकुर ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
कहा कि यह निर्णय कर्मचारियों के खिलाफ है। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने भी कर्मचारियों को ललकारा था, उन्हें भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। उन्होंने एचआरटीसी कर्मचारियों को पूरा सहयोग देने की बात कही है।
हड़ताल करना कर्मचारियों का हक : मेहता
सर्व कर्मचारी संगठन के प्रेस सचिव और पीटीए अनुबंध शिक्षक संघ के अध्यक्ष विवेक मेहता ने एचआरटीसी कर्मचारियों को पूर्ण सहयोग देने की बात कही है। कहा कि यह फैसला कर्मचारियों के खिलाफ है। कर्मचारियों ने अपनी मांगे पूरी करने के लिए हड़ताल की थी, जो कर्मचारियों का हक है।
कर्मचारी नेता बोले, नहीं मिले बर्खास्तगी ऑर्डर
प्रदेश सरकार के एचआरटीसी के 30 कर्मचारी नेताओं को बर्खास्त करने के निर्णय से परिवहन निगम में हड़कंप मचा हुआ है। शुक्रवार को ओल्ड बस अड्डे पर हर कर्मचारी की जुबान पर नेताओं की बर्खास्तगी की ही बात थी।
बर्खास्त किए गए सभी 30 कर्मचारी नेताओं ने सुबह दस बजे दफ्तर पहुंचकर हाजिरी लगाने के बाद रूटीन का काम निपटाया। बर्खास्तगी के ऑर्डर को लेकर मुख्य कार्यालय में फोन बजते रहे, लेकिन शाम पांच बजे तक कर्मचारी नेताओं को निगम प्रबंधन से ऑर्डर जारी नहीं हुए।
परिवहन मंत्री के इस निर्णय से एचआरटीसी कर्मचारी सहमे हुए हैं। सचिवालय से लेकर हर विभाग, निगम और बोर्डों के कार्यालयों में इसको लेकर खूब चर्चा है। परिवहन मंत्री जीएस बाली के वीरवार को लिए गए निर्णय से एचआरटीसी के कर्मचारी नेता चुप्पी साधे हैं। बर्खास्तगी से पहले जहां कर्मचारी नेता खुलकर बोल रहे थे, लेकिन कार्रवाई के बाद सभी चुप्पी साधे हुए हैं।
नहीं मिले ऑर्डर
एचआरटीसी सर्व कर्मचारी महासंघ के महासचिव खमेंद्र गुप्ता ने बताया कि निगम प्रबंधन से उन्हें बर्खास्तगी के ऑर्डर नहीं मिले हैं। कर्मचारियों ने पहले की तरह शुक्रवार को अपनी ड्यूटी दी है।