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तृतीय श्रेणी तक के सभी कर्मचारियों को ई-मेल आईडी बनाना अनिवार्य

Fri, 30 Oct 2020 07:51 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 30 Oct 2020 07:51 PM IST
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email ID for all employees up to class III Mandatory: high court
हाईकोर्ट हिमाचल - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल के सभी विभागों में तृतीय श्रेणी तक के कर्मचारियों को ई-मेल आईडी बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों को इस बाबत एडवाइजरी जारी की है। शुक्रवार को उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूल-कॉलेज प्रिंसिपलों और जिला उपनिदेशकों को इस संदर्भ में पत्र जारी किया है। हाईकोर्ट ने कोरोना संकट के बीच हुई कई सेवा मामलों की सुनवाई के दौरान पाया कि कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी पर्सनल ई-मेल आईडी नहीं बनाई है। कोर्ट ने कहा कि तकनीक के इस युग में ई-मेल आईडी होने से सूचनाओं का आदान-प्रदान सुगम होता है। ऐसे में कोर्ट ने निर्देश दिए कि सभी विभागों में तृतीय श्रेणी तक के कर्मचारियों को ई-मेल आईडी बनानी चाहिए। इसी कड़ी में शुक्रवार को शिक्षा निदेशालय ने कोर्ट के फैसले का पालन करते हुए जिलों को पत्र जारी किया है।

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सनवारा के ढाबा मालिक के हत्या आरोपी की जमानत याचिका खारिज

हिमाचल उच्च न्यायालय ने सनवारा के ढाबा मालिक के हत्यारोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति सीबी बारोवालिया ने राहुल मलिक की ओर से दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। आरोप है कि उसने कथित रूप से ढाबा मालिक पर फायरिंग की थी।  अभियोजन पक्ष के अनुसार 26 जून 2016 को आरोपियों ने सनवारा धर्मपुर (सोलन) में एक रेस्तरां (ढाबा) चलाने वाले परमजीत सिंह के ऊपर कथित रूप से गोलीबारी की। परमजीत की पत्नी की शिकायत पर 27 जून 2016 को धर्मपुर पुलिस स्टेशन जिला सोलन में आपराधिक मामला दर्ज किया गया।  शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि घटना के दिन ढाबे की देखभाल उनका भतीजा हसनदीप भी कर रहा था।

26 जून 2016 को जब वह कपड़े धो रही थी, तभी लगभग पांच बजे 10-15 व्यक्तियों का एक पर्यटक समूह ढाबे में आया। इसके बाद भोजन की ताजगी को लेकर विवाद हुआ और हाथापाई हुई। पर्यटक समूह का एक व्यक्ति वाहन के पास गया। एक पिस्तौल लाया और उसके पति परमजीत पर फायर किया। हसनदीप को भी उसके सीने पर बंदूक की नोक से मारा। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि वह पिछले चार वर्षों से अधिक समय से सलाखों के पीछे है और ट्रायल जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है। 

हालांकि, दूसरी ओर अभियोजन एजेंसी ने कहा कि याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता। क्योंकि याचिकाकर्ता ने खुलेआम फायरिंग की और परिणामस्वरूप ढाबा मालिक की मृत्यु हो गई। याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस बारोवालिया ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए, याचिकाकर्ता की भूमिका कथित अपराध के दृष्टिगत  प्रतीत होती है कि वह साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है और न्याय से भाग सकता है। यह याचिका को स्वीकार करने के लिए न्यायिक विवेक के दृष्टिगत उचित मामला नहीं है।

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