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घर और उद्योग से निकलने वाले ताप से बन सकेगी बिजली, पढ़ें पूरा मामला

Tue, 20 Aug 2019 01:59 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 20 Aug 2019 01:59 PM IST
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Electricity generation from Heat of home and industry in himachal
- फोटो : अमर उजाला

अब उद्योग, बिजली संयंत्र, घरेलू उपकरण और ऑटोमोबाइल के परिचालन आदि विभिन्न स्रोतों से पैदा होने वाले ताप को बिजली में बदला जा सकता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के बेसिक साइंस विभाग के शोधकर्ताओं ने ताप को अधिक सक्षमता से बिजली में बदलने के लिए थर्मोइलैक्ट्रिक सामग्री का विकास किया है।

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टीम के शोधपत्र एप्लायड फिजिक्स लेटर्स, फिजिकल रिव्यू बी, जर्नल ऑफ एलॉयज और कंपाउंड्स, एसीएस एप्लायड एनर्जी मटीरियिल्स, आरएससी जर्नल ऑफ मटीरियल्स कैमिस्ट्री और एनर्जी इनवॉयरनमेंटल साइंसेज समेत कई प्रतिष्ठित पीयर-रिव्यू जर्नलों में प्रकाशित हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एक लंबे समय से सौर ऊर्जा पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, ऊर्जा के अन्य स्रोतों में भी उतनी ही संभावना है। जबकि उनके बारे में जानकारी कम है। 
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सीबेक इफेक्ट का सिद्धांत 
आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर (भौतिक विज्ञान) डॉ. अजय सोनी के कहा कि ताप से बिजली तैयार करना एक अच्छी संभावना है। क्योंकि उद्योग, बिजली संयंत्र, घरेलू उपकरण और ऑटोमोबाइल के परिचालन आदि विभिन्न स्रोतों से ताप पैदा होता है। परंतु अधिकांश ताप बरबाद हो जाता है। थर्मोइलैक्ट्रिक मटीरियल्स सीबेक इफेक्ट के सिद्धांत पर काम करता है। जिसमें दो मटीरियल्स के जंक्शन पर ताप में अंतर होने से बिजली पैदा होती है।

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नामी कंपनियां भी कर रही काम

पश्चिमी दुनिया में फोक्सवैगन, वोल्वो, फोर्ड और बीएमडब्ल्यू जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियां ताप विद्युत का व्यर्थ ताप वापस पाने की प्रक्रिया विकसित कर रही हैं। जिससे ईंधन खपत में तीन से पांच प्रतिशत तक सुधार की संभावना है। थर्मोइलैक्ट्रिक एनर्जी हार्वेस्टिंग के अन्य संभावित उपयोगों में ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरण और इलैक्ट्रॉनिक्स, हवाई जहाज और अंतरिक्ष यान से उत्पन्न ताप का उपयोग भी शामिल हैं। 

शोध में इन्होंने दिया साथ
शोध समूह ने नए सॉफ्ट फोनो मोड का अवलोकन किया है जो मटीरियल्स के अंदर क्रिस्टलाइन ऐनहार्मोनीसीटी का प्रदर्शन करते हुए बेहतर तापविद्युत क्षमता का संकेत देते हैं। विभिन्न मटीरियल के लिए 1 - 1.6 की रेंज में उच्च फिगर ऑफ मेरिट का प्रदर्शन करते हैं। प्राप्त परिणाम पर अधिक जानकारी जुटाने और सुधार करने की संभावना देते हैं। उन्होंने बताया कि इस शोध के लिए आईआईटी मंडी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग - विज्ञान एवं इंजीनियिरंग शोध बोर्ड (डीएसटी-एसईआरबी) और आणविक ऊर्जा विभाग - नाभिकीय विज्ञान शोध बोर्ड (डीएई-बीआरएनएस), भारत ने व्यापक वित्तीयन सहयोग दिया है।

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