शिक्षा सचिव और निदेशक हाईकोर्ट में तलब, ये है वजह
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उच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना न करने पर शिक्षा सचिव और निदेशक को हाईकोर्ट के समक्ष हाजिर होने के आदेश दिए गए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि क्यों न दोनों को दंडित किया जाए। मामले पर अगली सुनवाई चार अक्तूबर को होगी।
निदेशक उच्च शिक्षा की ओर से भेजी सूचना के अनुसार यह बताया गया था कि हाईकोर्ट के पारित निर्णय को एडवाइजरी विभाग के साथ जांच की जा रही है और उन्हें इस बाबत दो माह का अतिरिक्त समय दिया जाए।
न्यायाधीश विवेक ठाकुर ने निदेशक शिक्षा की भेजी सूचना का अवलोकन करने के बाद यह कहा कि शिक्षा विभाग हाईकोर्ट के पारित निर्णय की अनुपालना में बेवजह देरी कर रहा है। न्यायालय ने शिक्षा विभाग की भेजी सूचना को अवमानना के दायरे में पाते हुए उपरोक्त आदेश पारित कर दिए।
अवमानना याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थी इकबाल सिंह को प्रदेश उच्च न्यायालय ने 20 अप्रैल 2007 से जूनियर असिस्टेंट के पद पर नियमित तौर पर लिए जाने के आदेश जारी किए थे। न्यायालय ने सभी सेवा लाभ दाे माह के भीतर दिए जाने के आदेश पारित किए थे।
प्रार्थी का आरोप था कि प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 14 अगस्त 2018 को अपना निर्णय प्रार्थी के पक्ष में सुना दिया था, लेकिन शिक्षा विभाग इस निर्णय को अनुपालना करने के लिए तरह-तरह के बहाने बना रहा है।
प्रार्थी निजी प्रबंधन के चलाए जा रहे कांगड़ा जिला के चंद्रधर गुलेरी डिग्री कॉलेज हरिपुर में कार्य कर रहा था। इस कॉलेज को 20 अप्रैल 2007 को राज्य सरकार ने अपने अधीन ले लिया था। प्रार्थी को सरकारी कॉलेज में नियमित तौर पर न ऑब्जर्व किए जाने पर प्रार्थी ने हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल की थी।